Delhi News: अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर लोग अक्सर पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का विकल्प चुनते हैं। इन विकल्पों में ब्याज दरें काफी ज्यादा होती हैं, जो बाद में भारी वित्तीय बोझ बन जाती हैं। ऐसे समय में पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ खाता एक बेहद सस्ता और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है।
पीपीएफ अकाउंट पर मिलने वाला लोन बाजार के दूसरे अनसिक्योर्ड कर्जों के मुकाबले काफी सस्ता होता है। इसके लिए आपको बैंकों के चक्कर काटने या किसी तरह की भारी-भरकम गारंटी देने की जरूरत नहीं पड़ती। पीपीएफ एक लंबी अवधि का निवेश माध्यम है, जिसकी कुल मैच्योरिटी अवधि 15 साल की होती है।
तीसरे से छठे वित्तीय वर्ष के बीच मिलता है लोन
ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक पीपीएफ खाते से कर्ज लेने के लिए एक खास समय सीमा तय होती है। अकाउंट खोलने वाले साल के बाद तीसरे वित्तीय वर्ष की शुरुआत से लेकर छठे वित्तीय वर्ष के अंत तक ही इस सुविधा का फायदा उठाया जा सकता है। इसके बाद निवेशक आंशिक निकासी के हकदार बनते हैं।
लोन की रकम आपके खाते के कुल बैलेंस पर तय नहीं होती है। नियम के अनुसार आप जिस साल आवेदन कर रहे हैं, उससे ठीक दो साल पहले के वित्तीय वर्ष के अंत में मौजूद बैलेंस का अधिकतम 25 फीसदी हिस्सा ही बतौर कर्ज मिल सकता है। इसी कारण मंजूर होने वाली रकम उम्मीद से कम हो सकती है।
ब्याज दरें होती हैं बेहद किफायती और कम
पीपीएफ पर मिलने वाला कर्ज किसी भी क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन की तुलना में बहुत किफायती होता है। इसकी वजह यह है कि आप अपनी ही बचत के एवज में पैसा लेते हैं। इस लोन पर लगने वाला ब्याज सीधे तौर पर पीपीएफ खाते पर मिलने वाले इंटरेस्ट रेट से जुड़ा होता है।
यह कर्ज आपकी आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। लोन मंजूर होने के बाद मूलधन चुकाने के लिए पूरे 36 महीने का वक्त मिलता है। मूलधन का पूरा पैसा चुकता होने के बाद ही ब्याज का भुगतान करना होता है। एक लोन खत्म होने के बाद ही दूसरा लोन मिल सकता है।

