हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार, सरकार ने उपायुक्तों को सौंपे वित्तीय गड़बड़ी रोकने के कड़े अधिकार

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला किया है। सरकार ने पंचायतों में होने वाले वित्तीय भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर रोक लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। इसके तहत राज्य के सभी उपायुक्तों को विशेष भ्रष्टाचार निरोधक कानून के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किया गया है।

प्रशासन का यह कड़ा नियम केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों या सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। नई व्यवस्था के तहत वे निजी व्यक्ति भी जांच के दायरे में आएंगे, जो पंचायत के विकास कार्यों में किसी भी तरह के अवैध लाभ या वित्तीय हेरफेर में सीधे तौर पर शामिल पाए जाएंगे।

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उपायुक्तों की लिखित रिपोर्ट से शुरू होगी कानूनी कार्रवाई

पंचायती राज विभाग के सचिव सी पालरासु ने इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। यह नया आदेश विभाग की पिछली अधिसूचना के विस्तार के रूप में लागू किया गया है। अब जिलों के उपायुक्त लिखित रिपोर्ट जारी करेंगे, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू होगी।

इस नीतिगत बदलाव के बाद भ्रष्ट तत्वों की मदद करने वाले बाहरी मददगारों पर भी शिकंजा कसेगा। प्रशासन का मानना है कि इस सख्त कदम से ग्रामीण स्तर की योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके साथ ही सरकारी बजट के दुरुपयोग पर पूरी तरह से रोक लगाने में बड़ी मदद मिलेगी।

पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत करने की अनूठी पहल

पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह फैसला बेहद जरूरी था। इस नई व्यवस्था से ग्रामीण विकास योजनाओं की जमीनी निगरानी प्रणाली पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। सरकार का यह ऐतिहासिक निर्णय गांवों में जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ग्रामीण विकास के बजट की पाई-पाई का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहती है। नए नियम लागू होने से जनता के पैसे की बर्बादी रुकेगी। जिला प्रशासन अब सीधे तौर पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ पुलिसिया और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा सकेगा।

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