Noida News: हिमाचल प्रदेश के एक 73 वर्षीय बुजुर्ग मदनलाल शर्मा ने स्टेज 3 के ओरल कैंसर को मात दे दी है। नोएडा के कैलाश अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने छह घंटे लंबी एक अनोखी और जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मरीज को रीढ़ की हड्डी का गंभीर विकार था।
गंभीर बीमारियों के कारण डॉक्टरों ने बदली सर्जरी की विधि
मरीज मदनलाल को अपनी जीभ के नीचे एक बड़ी गांठ महसूस हुई थी। जांच के बाद डॉक्टरों ने उनमें आक्रामक ओरल कैंसर का निदान किया। इसके साथ ही मरीज क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और गंभीर काइफोस्कोलियोसिस जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। इस कारण सीधे लेटना मुमकिन नहीं था।
मरीज की रीढ़ की हड्डी के विकार को देखते हुए डॉक्टरों ने ऑपरेशन की पूरी प्रक्रिया को बदल दिया। डॉ. मनीष साहनी के नेतृत्व में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम ने संशोधित लेटरल यानी करवट दिलाकर मरीज की यह छह घंटे लंबी सर्जरी की।
इलाज में उम्र नहीं बनती बाधा, सही योजना जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार बुजुर्ग कैंसर मरीजों में कई तरह की अन्य बीमारियां एक साथ देखने को मिलती हैं। हालांकि सावधानीपूर्वक बनाई गई योजना और डॉक्टरों की बहु-विभागीय सूझबूझ से कैंसर को सुरक्षित रूप से शरीर से बाहर निकाल दिया गया। यह मामला साबित करता है कि उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
उच्च जोखिम वाले मरीज होने के बावजूद ऑपरेशन के बाद बुजुर्ग की रिकवरी बहुत ही सुचारू और बेहतर रही। उन्हें महज पांच से छह दिन के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब मरीज पूरी तरह से कैंसर-मुक्त हैं और अपना सामान्य जीवन अच्छे से जी रहे हैं।
ओरल कैंसर के इन प्रमुख लक्षणों को न करें नजरअंदाज
भारत में ओरल कैंसर के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि यदि किसी भी व्यक्ति को मुंह में निम्नलिखित लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक दिखाई दें, तो उन्हें बिना देरी किए तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए:
- मुंह में लगातार छालों का बने रहना
- जीभ के नीचे या मुंह के अंदर कोई गांठ होना
- भोजन या पानी को निगलने में कठिनाई होना
- मुंह के भीतर सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना
- मुंह से लगातार खून आना या दर्द होना
- सामान्य रूप से बोलने में दिक्कत महसूस होना

