Uttarakhand News: उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस बार केवल चिकित्सा अधिकारियों ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों के कर्मियों को भी स्थानांतरण नीति के दायरे में लाया जाएगा। सरकार इस कदम के माध्यम से स्वास्थ्य तंत्र को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाना चाहती है।
विभाग की नई तबादला नीति में सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। वर्षों से मैदानी या सुगम क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों को अब अनिवार्य रूप से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में भेजा जाएगा। वहीं, दुर्गम इलाकों में लंबे समय से सेवा दे रहे चिकित्सकों को मैदानी क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलेगा।
निदेशालय और जिला अस्पतालों पर विशेष नजर
स्थानांतरण की इस प्रक्रिया में निदेशालय, जिला अस्पतालों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में वर्षों से जमे अधिकारियों और चिकित्सकों को भी बदला जाएगा। लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के कारण कार्यप्रणाली में जो ठहराव आ गया था, उसे दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा।
पिछले कुछ वर्षों में तबादला प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों की अधिकता और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी बनी हुई थी। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा था। कर्मचारी और चिकित्सक संगठन भी लंबे समय से तबादलों में पारदर्शिता लाने और स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग उठा रहे थे।
सक्रिय और जवाबदेह बनेगा पूरा स्वास्थ्य तंत्र
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और सचिव विनय शंकर पांडेय की मंशा स्वास्थ्य विभाग में बनी सुस्ती को खत्म करने की है। सरकार इस पूरी व्यवस्था को सक्रिय मोड में लाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। समय पर तबादले से न केवल व्यवस्था में लगी जंग हटेगी, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यह स्थानांतरण प्रक्रिया विभाग के कामकाज में नयापन लाएगी। इससे डॉक्टरों को भी विभिन्न क्षेत्रों में काम करने का अनुभव मिलेगा। सरकार की पूरी कोशिश है कि तबादलों में पक्षपात न हो और स्वास्थ्य विभाग का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शिता के साथ पहुँच सके।

