उत्तराखंड में आपदा सखी योजना का होगा विस्तार, अब महिलाओं को प्रोत्साहन राशि और बीमा का मिलेगा लाभ

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Uttarakhand News: आपदा के प्रति संवेदनशील उत्तराखंड में अब मातृशक्ति संकट के समय सुरक्षा कवच बनकर खड़ी रहेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर आपदा सखी योजना को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा रहा है। सरकार इस योजना में महत्वपूर्ण बदलाव कर रही है, ताकि चयनित महिलाओं को प्रोत्साहन राशि और बीमा जैसी विशेष सुविधाएं मिल सकें।

प्रधानमंत्री के आपदा जोखिम न्यूनीकरण एजेंडे से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री ने पिछले साल यह योजना लागू की थी। इसका मुख्य उद्देश्य आपदा के समय प्रभावित होने वाली महिलाओं को प्रथम बचावकर्ता के रूप में तैयार करना है। पूर्व में प्रशिक्षण के अभाव और प्रोत्साहन राशि न होने के कारण कुछ महिलाओं ने इसमें रुचि नहीं दिखाई थी।

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योजना में शामिल होंगे नए प्रावधान

सरकार अब इस योजना में बड़ा विस्तार करने जा रही है। स्वयं सहायता समूहों के अलावा महिला मंगल दल, आशा कार्यकर्ता, एएनएम और गैर सरकारी संस्थाओं की महिलाओं को भी आपदा सखी बनाया जाएगा। पहले चरण में क्लस्टर स्तरीय संगठनों से अब दो-दो महिलाओं का चयन होगा। इन्हें पहचान पत्र, ट्रैक सूट और विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आपदा प्रबंधन विभाग इस योजना का नया प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही राज्य कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद योजना को पूरे प्रदेश में सक्रियता से लागू किया जाएगा। चयनित सखियों को मिलने वाली सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि उनके मनोबल को बढ़ाएगी और वे आपदा में बेहतर काम कर सकेंगी।

विशेष संस्थानों में मिलेगा प्रशिक्षण

आपदा सखियों को आपदा प्रबंधन के गुर सिखाने के लिए राज्य के प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन्हें एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और नैनीताल स्थित प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये आपदा सखी अपने गांव और स्कूलों में जाकर अन्य महिलाओं व बच्चों को भी बचाव के उपाय सिखाएंगी।

आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार इस पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। कैबिनेट में प्रस्ताव आने के बाद योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी। इस प्रयास से उत्तराखंड के दूरदराज के क्षेत्रों में भी आपदा प्रबंधन का एक मजबूत तंत्र तैयार होगा, जिससे आपातकालीन स्थितियों में जान-माल का नुकसान कम होगा।

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