निवेशकों की कभी पहली पसंद रहा पीपीएफ आज के दौर में कितना फायदेमंद? जानिए विशेषज्ञों की सटीक राय

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Business News: एक समय था जब पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) लगभग हर भारतीय निवेशक की पहली पसंद हुआ करता था। टैक्स बचाने से लेकर सुरक्षित रिटर्न तक, यह सरकारी योजना लंबे समय तक निवेश का सबसे मजबूत विकल्प रही है। बदलते आर्थिक माहौल और नए डिजिटल निवेश विकल्पों के आने के बाद इसकी भूमिका में बड़ा बदलाव आया है।

ब्याज दरों में गिरावट और इक्विटी बाजार के बढ़ते विकल्प

पिछले कुछ वर्षों में ब्याज दरों में आई गिरावट की वजह से पीपीएफ पर मिलने वाला रिटर्न पहले की तुलना में कम हुआ है। इसके अलावा, नई टैक्स व्यवस्था अपनाने वाले निवेशकों के लिए इसके टैक्स लाभ भी पहले जितने आकर्षक नहीं रहे। दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड और इक्विटी आधारित निवेश विकल्प तेजी से लोकप्रिय हुए हैं।

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आज के दौर में म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने वाले मजबूत विकल्प माने जाते हैं, जिससे पीपीएफ अब निवेश का इकलौता माध्यम नहीं रह गया है। हालांकि, इस योजना में निवेश पर सरकार की शत-प्रतिशत गारंटी होती है, इसलिए पूंजी डूबने का कोई खतरा नहीं रहता, जो सुरक्षित निवेशकों को आकर्षित करता है।

पुराणी टैक्स व्यवस्था में आज भी मिलता है ईईई स्टेटस

जो निवेशक आज भी पुरानी टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुनते हैं, उन्हें पीपीएफ में ‘ट्रिपल ई’ यानी एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट टैक्स स्टेटस का पूरा लाभ मिलता है। इसका मतलब है कि निवेश की गई राशि, अर्जित ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला फाइनल फंड- तीनों पूरी तरह से टैक्स फ्री होते हैं, जो इसे खास बनाता है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में पीपीएफ को पूरे निवेश का आधार बनाने के बजाय एक संतुलित पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाना सबसे बेहतर रणनीति है। जहां इक्विटी और म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन का काम करते हैं, वहीं पीपीएफ आपके पूरे एसेट एलोकेशन को स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करता है।

वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार सुरक्षा और रिटर्न में बनाएं संतुलन

बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान भी पीपीएफ निवेशकों को मानसिक सुकून देता है क्योंकि इसमें रिटर्न की निश्चित गारंटी रहती है। आज निवेशकों के सामने असली सवाल यह है कि उनकी आय, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से इस सरकारी योजना में कितना पैसा एलोकेट होना चाहिए।

अगर आपका प्राथमिक लक्ष्य सुरक्षित बचत, सुनिश्चित टैक्स लाभ और लंबी अवधि में बिना किसी मार्केट रिस्क के फंड तैयार करना है, तो पीपीएफ आज भी एक बेहद मजबूत विकल्प है। सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के बीच सही संतुलन बनाने के लिए पीपीएफ के साथ-साथ इक्विटी आधारित निवेश को भी शामिल करना समझदारी होगी।

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