Delhi News: भारत के अंतरिक्ष विभाग (DoS) में वरिष्ठ वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के इस्तीफों से हड़कंप मचा है. पिछले एक साल में करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों ने नौकरी छोड़ी है. वे लगातार निजी स्पेस कंपनियों का रुख कर रहे हैं.
वैज्ञानिकों के इस पलायन को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बेहद कड़ा कदम उठाया है. अंतरिक्ष विभाग ने नया निर्देश जारी किया है. अब किसी भी वैज्ञानिक के इस्तीफे को स्थानीय स्तर पर सीधे मंजूरी नहीं दी जाएगी, बल्कि अंतिम फैसला मुख्यालय करेगा.
अहम स्पेस प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर्स ने छोड़ी नौकरी
इस्तीफा देने वालों में गगनयान और चंद्रयान-3 जैसी बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर्स और मैनेजर्स शामिल हैं. सरकार का मानना है कि मिशन के बीच में अचानक काम छोड़ने से देश के बड़े स्पेस प्रोजेक्ट्स पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है.
इसी वजह से सरकार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और इस्तीफे के नियमों को सख्त कर दिया है. हालांकि, इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है. उन्होंने कहा कि इससे परियोजनाओं को अचानक होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा.
मुख्यालय की मंजूरी के बिना नहीं स्वीकार होगा इस्तीफा
विभाग ने 14 जुलाई को एक आंतरिक आदेश जारी किया है. इसके तहत ‘ग्रुप ए’ के साइंटिफिक और टेक्निकल स्टाफ के इस्तीफे के अनुरोधों को रूटीन के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा. सभी सेंटर्स के डायरेक्टर्स को इस पर रोक लगाने को कहा गया है.
आदेश के अनुसार संबंधित स्पेस मिशन पूरा होने तक अधिकारी ऐसे मामलों को खुद मंजूर नहीं कर सकते. उन्हें अपनी सिफारिश के साथ हर फाइल को अंतिम फैसले के लिए सीधे हेडक्वार्टर भेजना होगा, ताकि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशनों में कोई बाधा न आए.
प्राइवेट सेक्टर में भारी डिमांड के चलते बढ़ी मुश्किलें
सूत्रों के मुताबिक विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के एलवीएम-3 प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ और यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट मैनेजर आदित्य रल्लापल्ली ने भी पद छोड़ दिया है. इससे इसरो के सबसे बड़े सेंटर्स पर सीधा असर पड़ा है.
कुल 14,600 कर्मचारियों में से यह संख्या भले छोटी हो, लेकिन अनुभवी टैलेंट का जाना चिंताजनक है. देश का प्राइवेट स्पेस सेक्टर इस समय बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. निजी कंपनियां मनमुताबिक पैसा दे रही हैं, जिससे इसरो के वैज्ञानिक वहां जा रहे हैं.

