Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके से एक बेहद दर्दनाक और दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां के एक होटल में अचानक लगी भीषण आग के बाद चारों तरफ मौत का तांडव देखने को मिला। सुलगते कमरों से निकलती आग की लपटों और जहरीले धुएं के बीच कई जिंदगियां फंस गईं।
अंधेरे और जहरीले धुएं के बीच लोगों की घुटती सांसों ने वहां के मंजर को बेहद खौफनाक बना दिया था। इस बेहद खतरनाक स्थिति में दमकल विभाग के जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। वहां फंसे 58 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की चुनौती थी।
दमकल कर्मियों की सांसें भी उखड़ीं
सफदरजंग फायर स्टेशन के जांबाज स्टेशन ऑफिसर मनोज महलावत और उनकी टीम ने नेहरू प्लेस व बीकाजी कामा प्लेस के दमकल कर्मियों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। इस दौरान आग की तपिश और जहरीले धुएं के कारण खुद बचाव कर्मियों की सांसें भी उखड़ने लगी थीं और उन्हें बेहोशी छाने लगी थी।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि आग बेसमेंट में बने एक रेस्तरां से शुरू होकर ऊपर की छठी मंजिल तक फैल चुकी थी। होटल के भीतर बेसमेंट से ऊपर जाने वाली सीढ़ियां न सिर्फ बीच में थीं, बल्कि ऊपर की तरफ जाने पर वे बेहद संकरी और तंग हो जाती थीं।
स्ट्रेचर की जगह चादरों का सहारा
होटल की सीढ़ियां इतनी संकरी थीं कि घायलों को निकालने के लिए स्ट्रेचर को अंदर ले जाना या मोड़ना बिल्कुल नामुमकिन था। ऐसे में दमकल कर्मियों ने सूझबूझ दिखाई और बाहर रेहड़ी-पटरी वालों से चादरें इकट्ठा कीं। गंभीर रूप से झुलसे पर्यटकों को इन्हीं चादरों में लिटाकर किसी तरह बाहर निकाला गया।
इस पूरे ऑपरेशन में एम्बुलेंस कर्मियों की भूमिका भी बेहद सराहनीय रही। उन्होंने दमकल कर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंदर फंसे लोगों को निकाला। जवानों ने जान पर खेलकर 19 लोगों को अचेत अवस्था में बाहर निकाला, जिनमें से कई लोगों की सांसें होटल के भीतर ही थम चुकी थीं।
शीशे तोड़कर दी गई ऑक्सीजन
होटल के कमरों की बनावट ने इस हादसे को और भयानक बना दिया था। अधिकांश कमरों में खिड़कियां थीं ही नहीं, और जिनमें थीं वे शीशे के पल्लों से पूरी तरह लॉक थीं। दमकल कर्मियों ने बिना वक्त गंवाए कमरों के भारी शीशे तोड़े, जिसके बाद कमरों के भीतर ताजी ऑक्सीजन पहुंच सकी।
कमरों के शीशे टूटने से न केवल वहां तड़प रहे लोगों को राहत मिली, बल्कि धुएं से जूझ रहे बचाव कर्मियों को भी नई सांसें मिलीं। इसी दौरान चौथी मंजिल पर एक पर्यटक खिड़की से हाथ हिलाकर मदद मांगता दिखा, जिसे जवानों ने बेहद सूझबूझ और बहादुरी के साथ सुरक्षित बचा लिया।
Author: Gaurav Malhotra

