हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी के छरमा को मिला जीआई टैग, वैश्विक बाजार में औषधीय सीबकथॉर्न को मिलेगी नई पहचान

Lahaul Spiti News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहुल-स्पीति की स्पीति घाटी में पाए जाने वाले छरमा यानी सीबकथॉर्न को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है। इस प्रतिष्ठित सम्मान के मिलने से अब स्पीति के छरमा और इससे तैयार होने वाले सभी पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक स्तर पर एक नई और अनूठी पहचान मिलेगी।

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स्थानीय ग्रामीण महिलाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के नए अवसर

इस ऐतिहासिक फैसले से घाटी के आम नागरिकों और विशेषकर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए और बेहतर अवसर पैदा होंगे। इससे उनकी आजीविका में बड़ा सुधार आएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी लाहुल क्षेत्र में हाथ से बने विशेष दस्ताने और जुराबों को भी भारत सरकार की ओर से प्रतिष्ठित जीआई टैग दिया जा चुका है।

सीबकथॉर्न के चमत्कारी फल से लेकर उसकी पत्तियों और जड़ों का बड़े पैमाने पर औषधीय इस्तेमाल किया जाता है। इसके पौधों के विभिन्न हिस्सों से कई तरह की जीवनरक्षक दवाएं और स्वास्थ्यवर्धक सप्लीमेंट उत्पाद बनाए जाते हैं। बाजार में इसकी भारी मांग के चलते स्थानीय किसानों को इसका सीधा आर्थिक लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है।

इसके अनूठे खट्टे फलों से स्वादिष्ट जूस, जैम, बिस्किट से लेकर हर्बल ग्रीन टी जैसे कई बेहतरीन ऑर्गेनिक प्रोडक्ट भी व्यावसायिक तौर पर तैयार किए जाते हैं। इस दुर्लभ पौधे का हर एक भाग प्राकृतिक औषधीय गुणों से पूरी तरह भरपूर है। यही वजह है कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में इसकी काफी मांग रहती है।

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माइनस पैंतालीस डिग्री तापमान में भी फलने-फूलने की क्षमता

यह अद्भुत पौधा शून्य से कई डिग्री नीचे के अत्यधिक बर्फीले तापमान पर भी पूरी तरह जीवित रह सकता है। माइनस 40 से 45 डिग्री के जमा देने वाले कड़ाके की ठंड में भी फलने-फूलने की इसकी अद्भुत प्राकृतिक खासियत इसे लाहुल-स्पीति के स्थानीय जनजातीय लोगों के लिए सर्दियों के मौसम में आय का एक बहुत बड़ा जरिया बनाती है।

वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार सीबकथॉर्न का फल मानव शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्वों से पूरी तरह भरपूर है, जो बेहतर स्वास्थ्य के लिए काफी गुणकारी साबित होता है। इससे बने सभी प्राकृतिक उत्पाद पेट से जुड़ी पुरानी बीमारियों से लेकर पाचन तंत्र को सुधारने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होते हैं।

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