ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की तीन दिवसीय हड़ताल: दिल्ली की सीमाओं पर ट्रकों की आवाजाही ठप, बाजारों पर संकट के बादल

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Delhi News: ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के आह्वान पर व्यावसायिक वाहनों की तीन दिवसीय हड़ताल आज गुरुवार, 21 मई से शुरू हो गई है। इस हड़ताल का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर समेत हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों पर पड़ने की आशंका है। हड़ताल के चलते दिल्ली की सीमाओं पर ट्रकों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो सकती है।

ट्रांसपोर्टरों ने व्यावसायिक वाहनों पर ‘हरित शुल्क’ (Green Tax) में वृद्धि और दिल्ली में बीएस-फोर (BS-IV) वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे फैसलों के विरोध में यह कदम उठाया है। AIMTC का दावा है कि हड़ताल के दौरान दूसरे राज्यों से व्यावसायिक वाहन दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश नहीं करेंगे। इससे दिल्ली की सीमाओं पर भारी जाम की स्थिति पैदा हो सकती है।

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बाजारों और आवश्यक सेवाओं पर पड़ेगा बुरा असर

व्यापारिक संगठनों ने हड़ताल को लेकर गहरी चिंता जताई है। दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसोसिएशन के महासचिव श्रीभगवान बंसल के अनुसार, इस हड़ताल से दिल्ली के बाजारों में सामान की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होगी। यदि स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो व्यापारियों का कारोबार 50 प्रतिशत तक गिर सकता है। पहले से ही ईंधन संकट से जूझ रहे बाजार के लिए यह एक बड़ा झटका है।

हड़ताल का असर दूध, सब्जी और दवा जैसी आवश्यक सेवाओं पर भी पड़ने की संभावना है। हालांकि, ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच इस पर मतभेद भी हैं। कई संगठन आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई को हड़ताल से अलग रखने के पक्ष में हैं, लेकिन AIMTC ने सभी व्यावसायिक वाहनों के शामिल होने का दावा किया है। एक अनुमान के मुताबिक, प्रतिदिन लगभग 25 से 30 हजार व्यावसायिक वाहनों का परिचालन ठप हो सकता है।

टैक्सी-ऑटो का रुख और सरकार से हस्तक्षेप की मांग

राहत की बात यह है कि दिल्ली के ऑटो, टैक्सी और पर्यटन वाहनों ने इस हड़ताल से खुद को दूर रखा है। दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ और टैक्सी यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं हैं और जनता की मुश्किलें नहीं बढ़ाना चाहते। हालांकि, ओला-उबर जैसे कैब सेवाओं के एक धड़े ने ट्रांसपोर्टरों की मांगों को नैतिक समर्थन दिया है।

फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन ने केंद्र और दिल्ली सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित न हो। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उनकी मांगें ‘अन्यायपूर्ण’ शुल्कों और बिना वैज्ञानिक आधार के प्रतिबंधों के खिलाफ हैं। फिलहाल, दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि हड़ताल के दौरान शांति बनी रहे।

Author: Gaurav Malhotra

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