Kullu News: कुल्लू रेव पार्टी मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ संशोधन आवेदन दायर करेगी। सरकार के महाधिवक्ता अनूप रत्न ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से यह बिल्कुल नहीं लगता कि जिला प्रशासन और पुलिस ने कर्तव्यों के निर्वहन में कोई लापरवाही बरती है।
अधिकारियों का तबादला समस्या का स्थाई समाधान नहीं
महाधिवक्ता अनूप रत्न का मानना है कि केवल डीसी, एसपी और एसडीएम का तबादला कर देना इस गंभीर मामले का कोई सही समाधान नहीं है। हाई कोर्ट ने इस मामले का खुद संज्ञान लिया था। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर इन अफसरों के ट्रांसफर का निर्देश दिया था।
महाधिवक्ता ने कहा कि अदालती आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के बाद सरकार को महसूस हुआ कि कुछ बेहद महत्वपूर्ण तथ्य हाई कोर्ट के समक्ष समय पर नहीं रखे जा सके। इस विषय पर उन्होंने डीसी और एसपी से भी लंबी चर्चा की है, जिसके बाद नए कानूनी कदम उठाने का फैसला लिया गया।
वैध लाइसेंस के साथ सादे कपड़ों में तैनात थी पुलिस
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस रेव पार्टी के आयोजन को साउंड सिस्टम बजाने की बाकायदा अनुमति मिली थी। इसके अलावा, आयोजकों के पास आबकारी विभाग के नियमों के तहत शराब परोसने का वैध लाइसेंस भी मौजूद था। हालांकि, पुलिस टीम ने पहले ही मादक पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका दर्ज की थी।
महाधिवक्ता ने बताया कि इस म्यूजिकल इवेंट के दौरान स्थानीय पुलिस और एसटीएफ के जवान सादे कपड़ों में लगातार मौके पर निगरानी कर रहे थे। कुल्लू क्षेत्र में पिछले 10-12 वर्षों से ऐसे कार्यक्रम होते रहे हैं। प्रशासन ने हमेशा की तरह इस बार भी पूरी तय प्रक्रिया के तहत अनुमति दी थी।
पूर्ण प्रतिबंध के बजाय एसओपी बनाने की वकालत
हिमाचल सरकार का मानना है कि ऐसे मनोरंजन कार्यक्रमों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय एक सख्त मानक संचालन प्रक्रिया बनाई जानी चाहिए। उचित रेगुलेशन लागू होने से निजी सुरक्षा व्यवस्था, शराब परोसने की टाइमिंग, मादक पदार्थों की रोकथाम और प्रशासनिक निगरानी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा।
अनूप रत्न ने दोहराया कि नशे के खिलाफ प्रदेश सरकार पूरी तरह गंभीर है और उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है। राज्य में सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। यदि जांच में किसी स्तर पर कोई प्रशासनिक कमी पाई जाती है, तो सरकार उस पर जरूर उचित विचार करेगी।
महाधिवक्ता ने कहा कि वर्तमान में उपलब्ध सभी कानूनी तथ्यों के आधार पर अदालत के सामने पूरा पक्ष मजबूती से रखा जाएगा। सरकार हाई कोर्ट से अपने इस सख्त आदेश में जरूरी संशोधन करने का विशेष अनुरोध करेगी। इसके लिए पूरी कानूनी तैयारी पूरी कर ली गई है ताकि न्याय मिल सके।

