Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पौंग बांध विस्थापितों को राजस्थान में जमीन आवंटित न करने के मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस देरी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए श्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। कोर्ट ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह इन विस्थापितों की तीसरी पीढ़ी है, जो आज भी अपने कानूनी हक के लिए दर-दर भटक रही है।
श्रीगंगानगर की जगह 600 किलोमीटर दूर जैसलमेर में जमीन देने पर मांगा जवाब
माननीय अदालत ने अनुपालन याचिकाओं की गहन सुनवाई के बाद एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि राजस्थान सरकार विस्थापितों को श्रीगंगानगर में तयशुदा उपजाऊ भूमि नहीं दे रही है। इसके बजाय उन्हें वहां से करीब 600 किलोमीटर दूर रेगिस्तानी इलाके जैसलमेर में भेजा जा रहा है।
उच्च न्यायालय ने राजस्थान सरकार से इस अड़ंगे का तार्किक और स्पष्ट कारण बताने को कहा है। कोर्ट ने साफ किया कि इस मनमाने फैसले की वजह स्पष्ट की जानी बेहद जरूरी है। इस संवेदनशील मामले पर अब अगली बड़ी सुनवाई आगामी 22 जुलाई को तय की गई है।
पुनर्वास के नाम पर विस्थापितों को थार मरुस्थल के कठिन क्षेत्रों में भेजने का विरोध
पिछली अदालती सुनवाई के दौरान भी याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने बेंच को वस्तुस्थिति से अवगत कराया था। उन्होंने बताया था कि पौंग बांध विस्थापितों को राजस्थान के जैसलमेर और बीकानेर जैसे अत्यधिक गर्म और कठिन मरुस्थलीय क्षेत्रों में पुनर्वास के नाम पर जबरन धकेला जा रहा है।
उन बंजर और दुर्गम इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण इंसानी जीवन जीना बिल्कुल आसान नहीं है। इस दलील पर हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर ऐसा है, तो हिमाचल सरकार का भी यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह अपने नागरिकों के लिए राज्य के भीतर ही सुरक्षित भूमि उपलब्ध करवाए।
दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक और आरक्षित भूमि का पूरा लेखा-जोखा
हाई कोर्ट ने इसी संदर्भ में पूर्व में एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया था। कोर्ट ने हिमाचल और राजस्थान दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को एक विशेष साझा बैठक करने के आदेश दिए थे, ताकि इस दशकों पुरानी मानवीय समस्या का कोई स्थायी और व्यावहारिक कानूनी हल निकाला जा सके।
उल्लेखनीय है कि कुल 16,352 पौंग बांध विस्थापितों के व्यवस्थित पुनर्वास के लिए राजस्थान के गंगानगर जिले में दो लाख 20 हजार एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी। लेकिन प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के कारण आज भी 5000 से अधिक पौंग बांध विस्थापित पुनर्वास और न्याय के लिए लगातार भटक रहे हैं।

