2047 तक विकसित भारत के लिए युवाओं को नशे से बचाना जरूरी, राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने किया जन आंदोलन का आह्वान

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बुधवार को नशीली दवाओं के खिलाफ एक बड़े संयुक्त सामाजिक आंदोलन की वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए देश के युवाओं को नशे के चंगुल से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

राज्यपाल शिमला के लोक भवन में आयोजित एक विशेष नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा आयोजित इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं में मादक द्रव्यों के सेवन के खतरनाक प्रभावों के बारे में गंभीर जन जागरूकता फैलाना था।

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नशा मुक्ति अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जरूरत

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल गुप्ता ने नशीली दवाओं के खिलाफ लड़ाई में बेहतरीन योगदान देने वाले समाजसेवियों को सम्मानित भी किया। इसके साथ ही उन्होंने जागरूकता से जुड़ी एक मार्गदर्शिका पुस्तिका का विमोचन किया। सोसायटी के पदाधिकारियों ने सामुदायिक भागीदारी से जुड़े अपने विभिन्न प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी साझा की।

इस अवसर पर बोलते हुए राज्यपाल ने इस पूरे अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे प्रयासों को जमीनी स्तर पर पूरी ताकत से लागू किया जाए, तो हिमाचल प्रदेश जल्द ही नशा मुक्त राज्य बन सकता है। युवा हमारे देश की सबसे मूल्यवान मानव पूंजी और बड़ी संपत्ति हैं।

एकल परिवार और अकेलेपन के कारण डिप्रेशन में आ रहे युवा

राज्यपाल ने समाज की बदलती परिस्थितियों और एकल परिवारों के चलन पर भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार व्यवस्था के टूटने से युवाओं में अकेलापन और तनाव तेजी से बढ़ रहा है। यही अवसाद यानी डिप्रेशन आगे चलकर युवाओं को ड्रग्स की तरफ धकेलता है।

उन्होंने अभिभावकों और कम्युनिटी लीडर्स से अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद को लगातार मजबूत बनाएं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षकों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय बच्चों की उचित काउंसलिंग और मार्गदर्शन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

नशे के खिलाफ लड़ाई को जन मिशन बनाना बहुत जरूरी

राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने जोर देकर कहा कि नशीली दवाओं के खिलाफ इस बड़ी लड़ाई को अकेले सरकार कभी नहीं जीत सकती। इसे एक प्रभावी जन मिशन का रूप देना ही होगा। समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए हमारी भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य की रक्षा करनी होगी।

उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षक, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठन एक साथ मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक इस सामाजिक बुराई को खत्म करना नामुमकिन है। हमारी युवा पीढ़ी को ड्रग्स के जाल से पूरी तरह मुक्त रखना इस समय पूरे देश की सबसे बड़ी सामूहिक जिम्मेदारी बन चुकी है।

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