Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के सेंट्रल रिज इलाके में जैव विविधता का दस्तावेजीकरण करने गए दो पर्यावरणविदों को एक बेहद चौंकाने वाली सफलता मिली है। पोलो ग्राउंड के पास स्थित एक विशाल क्वार्ट्जाइट चट्टान पर कुछ प्राचीन आकृतियां उकेरी हुई पाई गई हैं, जिसने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
जाने-माने पर्यावरणविद् प्रदीप कृष्ण और चेतन अग्रवाल रिज के अपने नियमित दौरे पर थे, जहां वे आमतौर पर समृद्ध पेड़-पौधों का अध्ययन करते हैं। इसी दौरान अग्रवाल की नजर जमीन से बाहर निकले एक बड़े पत्थर पर बने अजीब निशानों पर पड़ी। पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक, इन आकृतियों के काल और महत्व को समझने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।
अध्ययन के दौरान अचानक हुई खोज, इतिहासकार ने ‘पेट्रोग्लिफ’ होने का दिया सुझाव
इस अद्भुत खोज के बारे में बताते हुए दोनों पर्यावरणविदों ने कहा कि यह खोज पूरी तरह से एक इत्तेफाक थी। वे वहां पुरातत्व से जुड़ी चीजें खोजने नहीं, बल्कि सिर्फ प्रकृति का अध्ययन करने गए थे। आकृतियां दिखने के बाद वे अपने एक इतिहासकार दोस्त को वहां ले गए, जिन्होंने सुझाव दिया कि ये प्राचीन ‘पेट्रोग्लिफ’ हो सकती हैं।
सरल शब्दों में कहें तो ‘पेट्रोग्लिफ’ चट्टानों की सख्त सतह पर उकेरी या खरोंचकर बनाई गई प्राचीन प्रतीकात्मक आकृतियां या चित्र होते हैं। प्रदीप कृष्ण ने स्पष्ट किया कि वे इस विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए बिना किसी प्रामाणिक वैज्ञानिक जांच के इसके सटीक काल या इतिहास के बारे में कोई भी अंदाजा लगाना मुश्किल है।
हजारों साल पुरानी हो सकती हैं आकृतियां, विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक जांच की दी सलाह
क्वार्ट्जाइट पत्थर पर बनी यह नक्काशी कितनी पुरानी है, इसका सटीक अनुमान अभी नहीं लगाया जा सका है। यह संभव है कि ये आकृतियां एक हजार साल पुरानी हों या फिर कुछ सौ साल पुरानी। हालांकि, जानकारों ने इस ऐतिहासिक महत्व की खोज को लेकर बिना किसी पुख्ता सबूत के जल्दबाजी में कोई भी टिप्पणी करने से बचने की सलाह दी है।
प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. संजीव कुमार सिंह के अनुसार, अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। इसलिए यहां चट्टानों पर ऐसी आकृतियां मिलना कोई असामान्य बात नहीं है। हरियाणा और अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी कलाकृतियां पहले मिल चुकी हैं, जो वर्तमान में अकादमिक चर्चा और गहन शोध का मुख्य विषय बनी हुई हैं।

