Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में चल रहे एक बड़े डिजिटल सर्वे में हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं। शहर में हो रही डिजिटल भवन गणना का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इस शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक शहर के हजारों मकान पूरी तरह खाली पड़े हैं।
शिमला में कुल 72 हजार पंजीकृत भवनों में से लगभग 12 हजार मकान बिल्कुल खाली मिले हैं। इसके साथ ही करीब 7 हजार घरों के दरवाजों पर ताले लटके हुए पाए गए हैं। प्रशासन का अनुमान है कि यह काम पूरा होने पर खाली मकानों का आंकड़ा 15 हजार पार कर जाएगा।
जानिए आखिर क्यों खाली पड़े हैं पहाड़ों की रानी में मकान
राजधानी में बंद पड़े मकानों की यह बड़ी संख्या अब विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बन गई है। सर्वे के दौरान कई ऐसे बड़े भवन मिले हैं, जिनमें सालों से कोई नहीं रह रहा है। इनमें से कुछ मकानों का उपयोग केवल कभी-कभार छुट्टियों के दौरान ही किया जाता है।
जानकारों के अनुसार इस पलायन के पीछे कई मुख्य कारण हो सकते हैं। इनमें संपत्ति से जुड़े पुराने कानूनी विवाद और लोगों का दूसरे शहरों में बसना शामिल है। इसके अलावा शिमला में लगातार बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की भारी लागत भी इसकी एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
शहरी विकास योजनाओं के लिए डेटा होगा बेहद अहम
इस डिजिटल सर्वे के जरिए हर भवन का मालिकाना हक और वहां रहने वाले लोगों का पूरा डेटा जुटाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य की शहरी विकास योजनाओं और आवास नीति के लिए सटीक आंकड़े तैयार करना है, ताकि नगर निगम बेहतर काम कर सके।
फिलहाल डिजिटल भवन गणना का यह महत्वपूर्ण काम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो पाएगी। यह अंतिम रिपोर्ट शिमला के भविष्य की रूपरेखा तय करने में काफी मददगार साबित होगी।

