Kinnaur News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने किन्नौर जिले में अचानक आई बाढ़ और मलबे से उपजे हालातों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुल डूबने और रिहायशी इमारतों को पैदा हुए खतरे पर प्रशासन की सुस्ती पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने किन्नौर के उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
तैती खड्ड का मूल प्रवाह बहाल करने का मामला
मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। यह मामला ‘तैती खड्ड’ के मूल प्रवाह को बहाल करने से जुड़ा है। अदालत ने वहां जमा भारी मलबे और बड़े पत्थरों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट में पेश की गईं बाढ़ की तस्वीरें
सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने अदालत में 9 और 10 जुलाई 2026 को आई बाढ़ की तस्वीरें पेश कीं। इन तस्वीरों से साफ है कि मलबे के कारण पुल पूरी तरह पानी में डूब चुका है। इससे आसपास की रिहायशी इमारतों पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासन ने की अदालती आदेश की अवहेलना
हाईकोर्ट ने पाया कि अक्टूबर 2025 में ही जिला प्रशासन को भारी मशीनें तैनात करने के आदेश दिए गए थे। मगर हालिया रिपोर्ट से पता चला कि सितंबर 2025 में सिर्फ एक मशीन बहुत कम समय के लिए लगाई गई थी। कोर्ट ने इसे आदेश की सीधी अवहेलना माना है।
लोक निर्माण विभाग ने कोर्ट में दिया हलफनामा
लोक निर्माण विभाग के रामपुर मंडल के अधीक्षण अभियंता ने इस मामले में एक हलफनामा दायर किया है। इसके मुताबिक खड्ड के तल को 3 मीटर गहरा करने के लिए 1.25 करोड़ रुपये का बजट मंजूर होने के लिए भेजा गया है।
28 जुलाई की सुनवाई में डीसी देंगे स्पष्टीकरण
उच्च न्यायालय ने किन्नौर के उपायुक्त को निर्देश दिया है कि वे 28 जुलाई 2026 को कोर्ट में निजी तौर पर हाजिर रहें। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि मामला अदालत में लंबित होने के बाद भी नाले की सफाई के लिए पर्याप्त मशीनें क्यों नहीं लगाई गईं।

