पेंशन बहाली पर हिमाचल हाई कोर्ट का सख्त रुख, केंद्र और राज्य सरकार से पूछा- 15 साल का क्या है आधार?

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कम्यूटेशन के बाद पेंशन बहाली को लेकर बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि पूरी पेंशन बहाल करने के लिए 15 वर्ष की अवधि तय करने का क्या आधार है? हाई कोर्ट ने दोनों सरकारों को इस नियम का स्पष्ट औचित्य बताने को कहा है।

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सरकारें स्पष्ट करें नियम का औचित्य, नहीं तो कोर्ट निकालेगा प्रतिकूल निष्कर्ष

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई तीन जून को तय की है। अदालत ने कहा कि यदि सरकारें इसका कारण स्पष्ट नहीं कर पाईं, तो कोर्ट प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकता है। पीठ ने सरकारों को पूरी राशि चुकाने वालों की पेंशन बहाल करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा है।

यह मामला मुख्य आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के पद से साल 2013 में सेवानिवृत्त हुए एक कर्मचारी से जुड़ा है। प्रार्थी ने सेवानिवृत्ति के समय अपनी पेंशन का 40 प्रतिशत हिस्सा कम्यूटेशन कराने का विकल्प चुना था। इसके तहत प्रार्थी को विभाग की ओर से कुल 5,31,994 रुपये का एकमुश्त भुगतान किया गया था।

पूरी देनदारी चुकाने के बाद भी कट रही रकम, पीड़ित ने खटखटाया अदालत का दरवाजा

नियमों के अनुसार प्रार्थी को भुगतान के अगले महीने से पूरे 15 वर्ष बाद पूरी पेंशन बहाल की जानी थी। इसके लिए प्रार्थी की मासिक पेंशन से मार्च 2013 से लगातार रिकवरी की जा रही थी। प्रार्थी ने ब्याज समेत कुल 7,23,428 रुपये सरकार को वापस लौटा दिए हैं।

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याचिकाकर्ता ने बताया कि सरकार ने उनसे कुल 135 किस्तों में पेंशन के कम्यूटेड मूल्य और ब्याज की पूरी वसूली कर ली है। जून 2024 को आखिरी किस्त देने के बाद उनकी पूरी देनदारी खत्म हो गई थी। इसके बावजूद उनकी मासिक पेंशन से लगातार कटौती की जा रही है, जिसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में गुहार लगाई है।

Author: Sunita Gupta

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