पटना में ई-रिक्शा चालकों पर डिजिटल अटैक, मोबाइल ऐप के जरिए रिमोटली लॉक की जा रही बैटरियां

Patna News: बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर चल रहे ई-रिक्शा इन दिनों एक अनोखे डिजिटल अटैक का शिकार हो रहे हैं। कुछ शरारती तत्व एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी को दूर बैठे ही लॉक कर दे रहे हैं। इसके कारण बीच सड़क पर अचानक वाहन पूरी तरह ठप हो रहे हैं।

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इस तकनीकी समस्या के कारण ई-रिक्शा चालकों की दैनिक कमाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच यात्रियों को बीच रास्ते में ही उतरना पड़ रहा है। समय की बर्बादी को लेकर सड़कों पर चालकों और यात्रियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिल रही है।

शोरूम और सर्विस सेंटर पर बढ़ी शिकायतें

इस रहस्यमयी गड़बड़ी से ई-रिक्शा के स्थानीय शोरूम और सर्विस सेंटर संचालक भी पूरी तरह हैरान हैं। राजधानी के अटल पथ पर स्थित एक प्रमुख शोरूम में पिछले 24 घंटे के भीतर 34 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं। मैकेनिकों के अनुसार ब्लूटूथ एक्सेस का गलत इस्तेमाल करके बैटरी को अवैध रूप से लॉक किया जा रहा है।

वारंटी नियमों के कारण चालक खुद इस बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को खोलकर बंद नहीं कर सकते हैं। जानकारों के अनुसार जेबीडी और जेकेबीडी बीएमएस वाली बैटरियों में हैकिंग के सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं। इससे सुरक्षित बचने के लिए चालकों को पल्स नाम का ऐप डाउनलोड कर अपने वाहन को पहले ही सुरक्षित कनेक्ट कर लेना चाहिए।

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कमजोर ब्लूटूथ सिक्योरिटी बनी सबसे बड़ी कमजोरी

एनआईटी पटना के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अमितेश कुमार ने इस तकनीकी खामी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि कमजोर ब्लूटूथ सुरक्षा और डिफॉल्ट पासवर्ड न बदलना ही इस परेशानी की सबसे बड़ी वजह है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से आगे चलकर इलेक्ट्रिक कारें भी इसका शिकार बन सकती हैं।

केंद्र सरकार ने इस गंभीर मामले पर त्वरित एक्शन लेते हुए शुक्रवार को ऐसे कई खतरनाक मोबाइल ऐप को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। सरकार के इस कड़े कदम के बाद अब बिना सही पासवर्ड के ई-रिक्शा की बैटरी के साथ कोई भी बाहरी व्यक्ति किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा।

कंपनियों को देनी होगी चालकों को सही ट्रेनिंग

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में नए स्टार्टअप कम कीमत वाले ई-रिक्शा बेचने के लिए असुरक्षित तकनीकी कॉन्फिगरेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। आम तौर पर गरीब ई-रिक्शा चालक तकनीकी रूप से ज्यादा अपडेट नहीं होते हैं। इसलिए निर्माता कंपनियों को उनकी अपनी क्षेत्रीय भाषा में सुरक्षा संबंधी सही ट्रेनिंग देनी बहुत जरूरी है।

पीड़ित ई-रिक्शा चालक रंजीत कुमार ने बताया कि बैटरी लॉक होने के कारण उनका वाहन बीच सड़क पर बंद हो गया था। उन्हें चिलचिलाती धूप में गाड़ी को धक्का देकर सर्विस सेंटर तक ले जाना पड़ा। उनकी बैटरी वारंटी में थी, इसलिए मैकेनिकों ने बिना कोई चार्ज लिए उसे छह घंटे में ठीक कर दिया।

वाहन ठीक होने में कई घंटे बर्बाद होने से चालकों के पूरे दिन की कमाई पूरी तरह ठप हो जा रही है। पीड़ित चालकों ने सरकार और ई-रिक्शा निर्माता कंपनियों से इस तकनीकी मनमानी को रोकने की मांग की है। वे चाहते हैं कि इस डिजिटल समस्या का कोई स्थायी और सुरक्षित टेक्निकल समाधान जल्द निकाला जाए।

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