Health News: आज की तनावभरी जिंदगी में अवसाद यानी डिप्रेशन एक बेहद गंभीर वैश्विक मानसिक समस्या बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 28 करोड़ लोग इस खतरनाक बीमारी की चपेट में हैं।
जानिए क्या कहता है 96,000 लोगों पर हुआ यह बड़ा शोध?
मानसिक तनाव के इस दौर के बीच वैज्ञानिकों ने एक राहत भरी खोज की है। हाल ही में हुए 33 विभिन्न अध्ययनों के एक बड़े मेटा-विश्लेषण में 96,000 वयस्कों को शामिल किया गया था। इस शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शारीरिक गतिविधियां डिप्रेशन को मात दे सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग प्रतिदिन कम से कम 5,000 कदम चलते हैं, उनमें अवसाद के लक्षण बहुत कम देखे गए। इसके विपरीत, सुस्त जीवनशैली जीने वाले या इससे कम चलने वाले लोगों में मानसिक बीमारियों और अकेलेपन का खतरा काफी ज्यादा पाया गया है।
आखिर चलने से क्यों खुश रहता है हमारा इंसान का दिमाग?
पैदल चलने के पीछे का विज्ञान हमारे शरीर में मौजूद हार्मोन्स से गहराई से जुड़ा हुआ है। जब हम पैदल चलते हैं, तो हमारे शरीर में ‘एंडोर्फिन’ नामक हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। वैज्ञानिक भाषा में इस हार्मोन को ‘मूड बूस्टर’ भी कहा जाता है।
यह हार्मोन मानसिक तनाव और चिंता के लिए जिम्मेदार ‘कोर्टिसोल’ नामक खतरनाक हार्मोन के स्तर को तेजी से कम करता है। इसके प्रभाव से इंसान की मानसिक स्थिति पूरी तरह संतुलित हो जाती है और बिना किसी दवा के मूड में तुरंत सुधार होने लगता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्यों खास हैं सिर्फ 5,000 कदम?
आमतौर पर पूरी तरह फिट रहने के लिए रोजाना 10,000 कदम चलने का एक आदर्श लक्ष्य तय किया जाता है। हालांकि, नए शोध से यह साबित हो गया है कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए आपको बहुत ज्यादा फिटनेस एक्सपर्ट होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।
यदि आप रोजाना केवल 5,000 से 7,499 कदम भी चलते हैं, तो आपके अवसाद के लक्षणों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। दिनभर में मात्र 30 से 40 मिनट की तेज सैर आपके मस्तिष्क को रीफ्रेश करने और नकारात्मक विचारों को दूर रखने के लिए पर्याप्त है।
कदमों की संख्या बढ़ाने से कैसे घटता है डिप्रेशन का खतरा?
वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि आप अपने दैनिक कदमों की संख्या में केवल 1,000 कदमों का भी इजाफा करते हैं, तो अवसाद का खतरा 9 फीसदी तक कम हो जाता है। वहीं, जो लोग रोज 7,000 या उससे ज्यादा कदम चलते हैं, उनमें यह जोखिम 31 फीसदी तक घट जाता है।
पैदल चलने से हमारे मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह और न्यूरल कनेक्शन काफी मजबूत होते हैं। इससे दिमाग की नई कोशिकाएं बनती हैं जो सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर करती हैं। प्रकृति के बीच खुली हवा में टहलने से नींद का चक्र भी पूरी तरह सुधर जाता है।
Author: Asha Thakur


