India News: क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि बैंक के एटीएम पर पहुंचने के बाद आपको ‘नो कैश’ का बोर्ड नजर आया? आंकड़ों के अनुसार, बाजार में करेंसी की कोई कमी नहीं है। रिजर्व बैंक (RBI) के मुताबिक, देश में नकदी रिकॉर्ड स्तर पर है और यह 42.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में 12% अधिक है।
असल में समस्या करेंसी की उपलब्धता में नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की आपूर्ति श्रृंखला में है। बैंक से लेकर एटीएम तक पैसे पहुंचाने वाली व्यवस्था में बड़ी खामियां देखी जा रही हैं। आरबीआई के पास पर्याप्त नोट हैं, लेकिन वे ग्राहकों तक सही समय पर और सही मात्रा में नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे जनता को भारी परेशानी हो रही है।
एटीएम में कैश भरने में आ रही बाधा
एटीएम ऑपरेटरों को बैंकों से जरूरत के हिसाब से कैश नहीं मिल पा रहा है। मार्च 2026 में ऑपरेटरों को उनकी जरूरत का 64% कैश मिल रहा था, जो अप्रैल-मई में घटकर महज 57% रह गया है। एटीएम नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए 94,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जबकि ऑपरेटरों को सिर्फ 54,000 करोड़ रुपये ही उपलब्ध हो पा रहे हैं।
UPI का असर और बदलता गणित
UPI के बढ़ते चलन ने एटीएम के इस्तेमाल पर सीधा असर डाला है, जिसमें पिछले एक साल में 10% से अधिक की गिरावट आई है। ऑपरेटरों का बिजनेस मॉडल इस गिरावट को नहीं झेल पा रहा है। इसके अलावा, एटीएम संचालन की लागत (ईंधन, सिक्योरिटी और वेतन) लगातार बढ़ रही है, जिससे कंपनियों के लिए एटीएम चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
ग्राहकों का व्यवहार और बैंकिंग नियम
एटीएम ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़कर 23 रुपये होने से ग्राहकों ने एटीएम जाने की संख्या कम कर दी है। हालांकि, अब लोग एक बार में बड़ी रकम निकालते हैं, जिससे एटीएम में कैश स्टॉक का अनुमान लगाना कठिन हो गया है। साथ ही, बैंकों द्वारा कार्डलेस विड्रॉल को फ्री लिमिट में शामिल करने से भी पुराने सिस्टम का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है।
सरकारी रुख और समाधान
सरकार और आरबीआई ने कैश की कमी की अफवाहों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि 500 रुपये के नोटों की पर्याप्त सप्लाई है। अब छोटे नोटों (10, 20, 50 रुपये) की कमी को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में जल्द ही हाइब्रिड और विशेष एटीएम लगाने की योजना तैयार की गई है।
Author: Rajesh Kumar


