चीन के गढ़ में घुसा भारत, ड्रैगन को बेच डाले ₹35,000 करोड़ के पुर्जे, अश्विनी वैष्णव का बड़ा दावा

Delhi News: एक दौर था जब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के लिए पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर था। लेकिन आज भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन का एक बेहद मजबूत हिस्सा बन चुका है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आए इस ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव की जानकारी दी है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत अब सिर्फ विदेशों से पुर्जे मंगाकर असेंबल करने वाला देश नहीं रहा। भारत अब उन कंपोनेंट्स का भी बड़ा निर्माता बन चुका है, जिनसे पूरी दुनिया का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग चलता है। भारत की इस बढ़ती ताकत का असर अब चीन के बाजारों में भी दिखने लगा है।

चीन को लगी हजारों करोड़ की चपत

अश्विनी वैष्णव ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जिस चीन को दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स हब माना जाता है, भारत ने पिछले साल उसी चीन को करीब ₹35,000 करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स निर्यात किए हैं। यह भारतीय कंपनियों की वैश्विक बाजार में मजबूत होती पकड़ का सबसे बड़ा सबूत है।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को केवल “स्क्रू-ड्राइवर तकनीक” या असेंबली तक सीमित बताने वाले आलोचकों को केंद्रीय मंत्री ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि चीन, वियतनाम और ताइवान जैसे देशों ने भी पहले तैयार उत्पादों से ही शुरुआत की थी और भारत भी अब इसी सफल रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

रोजगार के क्षेत्र में आया महा-उछाल

इस सेक्टर के तेजी से बढ़ने की वजह से देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए और शानदार अवसर पैदा हुए हैं। सरकार के मुताबिक अकेले इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में अब तक 25 लाख से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां मिल चुकी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य संवर रहा है।

सरकार का पूरा फोकस अब देश के भीतर ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाना है। इसी रणनीति के तहत वर्तमान में देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 75 नई कंपोनेंट फैक्ट्रियों का निर्माण कार्य बहुत तेजी से चल रहा है, जिससे उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

आने वाले वर्षों में खुलेंगे फैक्ट्रियों के ताले

केंद्र सरकार का मुख्य लक्ष्य आने वाले दो से तीन सालों के भीतर देश में करीब 250 नई फैक्ट्रियां स्थापित करने का है। इसके लिए मार्च महीने में ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 29 नए और बड़े निवेश प्रस्तावों को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।

इन नए प्रस्तावों के जरिए देश में करीब ₹7,104 करोड़ का भारी-भरकम निवेश आएगा। इससे आने वाले समय में ₹84,515 करोड़ के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है। इस योजना से 14,246 सीधी नौकरियां पैदा होंगी। इससे पहले भी सरकार ₹54,567 करोड़ के निवेश वाले 46 प्रस्तावों को मंजूरी दे चुकी है।

Author: Harikarishan Sharma

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