ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सरकार ने लाल सागर और आतंकवाद पर दिया कड़ा संदेश!

Delhi News: राजधानी दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों से अहम मुलाकात की है। विदेश मंत्रालय ने इस पूर्व निर्धारित कूटनीतिक कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी दी है। भारत मंडपम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सभी विदेशी मेहमानों का विधिवत स्वागत किया। आज शाम सात बजे भारत मंडपम में इन मंत्रियों के सम्मान में भव्य रात्रिभोज का आयोजन होगा।

इस खास बैठक में हिस्सा लेने के लिए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची गुरुवार सुबह दिल्ली पहुंचे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए एस. जयशंकर ने दुनिया के सामने भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने साफ कहा कि वैश्विक व्यवस्था के लिए शांति और सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। जयशंकर ने दुनिया को याद दिलाया कि हाल के संघर्षों ने कूटनीति और आपसी संवाद के महत्व को साबित किया है। हमें सतत विकास की दिशा में बढ़ना होगा।

लाल सागर और आतंकवाद पर कड़ा संदेश

भारतीय विदेश मंत्री ने तकनीकी प्रगति और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का सही उपयोग सुशासन के लिए होना चाहिए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में चल रहे विवादों पर जयशंकर ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री रास्तों में आने वाली बाधाएं पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल सकती हैं। ऐसे मुश्किल समय में सुरक्षित और एकदम निर्बाध समुद्री प्रवाह बेहद जरूरी हो गया है।

इस अहम ब्रिक्स बैठक में रूस के सरगई लावरोफ, ब्राजील के माउरो विएरा और इंडोनेशिया के सुगिओनो जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं। इसके अलावा मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री भी हिस्सा ले रहे हैं। भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर केंद्रित है। यह विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मानवता प्रथम और जनकेंद्रित दृष्टिकोण से प्रेरित है।

ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन यानी शुक्रवार को सभी सदस्य और साझेदार देश एक विशेष सत्र में भाग लेंगे। इस महत्वपूर्ण सत्र का नाम ‘ब्रिक्स एट 20’ रखा गया है। इसमें लचीलापन, नवाचार, आपसी सहयोग और सतत विकास के निर्माण पर गहरी चर्चा होगी। इसके तुरंत बाद वैश्विक शासन और बहुपक्षीय प्रणाली में जरूरी सुधारों पर विस्तृत बातचीत की जाएगी। इस मंच से भारत दुनिया को सुरक्षित भविष्य का स्पष्ट संदेश दे रहा है।

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