Punjab News: पंजाब में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों ने गहरी चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नई रिपोर्ट ने एक कड़वी सच्चाई उजागर की है। राज्य में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत 782 मामले दर्ज हुए हैं। मामलों की संख्या बढ़ने के बावजूद न्याय दिलाने वाला सिस्टम काफी सुस्त नजर आ रहा है। राज्य में इन संवेदनशील मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की भारी कमी है। इस ढुलमुल रवैये से मासूम पीड़ितों को समय पर न्याय मिलना मुश्किल हो गया है।
पंजाब में केवल तीन पॉक्सो अदालतें, हरियाणा से बहुत पीछे
केंद्र सरकार ने 13 मार्च को लोकसभा में अदालतों के आंकड़े पेश किए हैं। इन आंकड़ों ने पंजाब के कमजोर न्यायिक ढांचे की पोल खोल दी है। राज्य में सिर्फ 12 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) काम कर रहे हैं। इनमें से बच्चों के यौन अपराध सुनने वाली विशेष पॉक्सो अदालतें केवल तीन हैं। इसके उलट पड़ोसी राज्य हरियाणा की स्थिति काफी बेहतर है। हरियाणा में 18 फास्ट ट्रैक कोर्ट और 14 विशेष पॉक्सो अदालतें हैं। हरियाणा में 2044 पॉक्सो मामले दर्ज हुए हैं। अदालतों की अधिक संख्या वहां न्याय की रफ्तार को बढ़ाती है।
देश के अन्य राज्यों में क्या है फास्ट ट्रैक अदालतों का हाल
हिमाचल प्रदेश में छह फास्ट ट्रैक कोर्ट काम कर रहे हैं। इनमें तीन विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर में चार फास्ट ट्रैक और दो पॉक्सो कोर्ट हैं। चंडीगढ़ में सिर्फ एक फास्ट ट्रैक कोर्ट है। यूपी में सबसे ज्यादा 218 फास्ट ट्रैक कोर्ट न्याय दे रहे हैं। मध्य प्रदेश में 67 और केरल में 55 फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं। बिहार में 54 और राजस्थान में 45 ऐसी अदालतें स्थापित हैं। इन राज्यों में मामलों का तेजी से निपटारा हो रहा है। पूरे देश में कुल 774 फास्ट ट्रैक और 398 विशेष पॉक्सो अदालतें मौजूद हैं। अब तक इन अदालतों ने 3.61 लाख मामलों का निपटारा किया है।
संसदीय समिति ने जताई चिंता, फंड के उपयोग पर उठाए सवाल
एनसीआरबी के अनुसार देश भर में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,77,335 मामले सामने आए। इनमें से 67,694 केस अकेले पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुए हैं। यह कुल अपराधों का 38.2 प्रतिशत है। संसदीय स्थायी समिति ने इस गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है। समिति ने राज्यों में अदालतों की संख्या तुरंत बढ़ाने पर जोर दिया है। अदालतों के लिए फंड का समय पर इस्तेमाल और कड़ी निगरानी बहुत जरूरी है। सिस्टम की यह सुस्ती बच्चों के न्याय में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। पंजाब सरकार को तुरंत अपना न्यायिक ढांचा मजबूत करने की जरूरत है।


