सुनील महतो हत्याकांड की मुख्य आरोपी माओवादी पुष्पा ने किया सरेंडर, 25 साल बाद पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

Ranchi News: झारखंड के जमशेदपुर के पूर्व सांसद सुनील महतो की नृशंस हत्या की मुख्य आरोपी और खूंखार माओवादी शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा ने आखिरकार कानून के सामने घुटने टेक दिए हैं। करीब 25 वर्षों तक तीन राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बनी 10 लाख रुपये की इनामी महिला कमांडर ने कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया है।

सांसद की छाती पर चढ़कर मनाया था जश्न

घाटशिला के बाघुड़िया फुटबॉल मैदान में 4 मार्च 2007 को नक्सलियों ने तत्कालीन सांसद सुनील महतो समेत चार लोगों की अंधाधुंध गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। इस जघन्य हत्याकांड के दौरान शकुंतला ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं। उसने मृत सांसद के शव की छाती पर खड़े होकर ऑपरेशन की सफलता का खौफनाक जश्न मनाया था।

10 वर्ष की उम्र में थामा था बंदूक का दामन

पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी स्थित मेचुआ गांव की रहने वाली शकुंतला महज 10 वर्ष की उम्र में माओवादी संगठन में शामिल हो गई थी। पांचवीं कक्षा तक पढ़ी शकुंतला संगठन के भीतर परी और वर्षा जैसे छद्म नामों से सक्रिय थी। साल 2005 में उसने झारग्राम स्क्वाड के एरिया कमांडर अतुल महतो से शादी कर ली थी।

कुख्यात नक्सली किशनजी की रही बेहद खास

शकुंतला माओवादियों के ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो और जोनल कमेटी की बेहद प्रभावशाली सदस्य थी। वह मारे जा चुके शीर्ष नक्सली नेता किशनजी (कोटेश्वर राव) की करीबी और वर्तमान में एक करोड़ रुपये के इनामी असीम मंडल की सबसे भरोसेमंद कमांडर थी। पूर्वी सिंहभूम के कई थानों में उसके खिलाफ नक्सली हिंसा के दर्जनों गंभीर मामले दर्ज हैं।

अत्याधुनिक हथियारों के साथ मुख्यधारा में वापसी

कोलकाता के लालबाजार पुलिस मुख्यालय में शकुंतला ने 46 राउंड कारतूस और अत्याधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। इससे पहले साल 2017 में संगठन के बड़े नेता रंजीत पाल और उसकी पत्नी झरना ने भी सरेंडर किया था। शकुंतला के इस फैसले से झारखंड, ओडिशा और बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।

Author: Rohit Mahato

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