Crime News: जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती पुंछ जिले में सुरक्षा बलों को एक बेहद संदिग्ध पैकेट बरामद हुआ है। इस पैकेट के भीतर से पाकिस्तानी करेंसी के नोट और पांच मोबाइल नंबरों वाली एक हस्तलिखित पर्ची मिली है। इस संवेदनशील बरामदगी के बाद सभी खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।
नार जंगल क्षेत्र में पेट्रोलिंग के दौरान मिला सुराग
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को मेंढर सेक्टर में सेना की एक टुकड़ी नियमित गश्त पर थी। जवान जम्मू-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप नार जंगल क्षेत्र में एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग कर रहे थे। इसी दौरान घने जंगल के पास जवानों की नजर एक लावारिस और संदिग्ध पैकेट पर पड़ी।
जवानों ने जब सावधानी से उस पैकेट की तलाशी ली, तो उसके अंदर से पाकिस्तानी मुद्रा के 110 रुपये मूल्य के नोट बरामद हुए। इसके साथ ही पैकेट के भीतर हाथ से लिखी हुई एक पर्ची भी मिली। इस पर्ची पर पांच मोबाइल फोन नंबर लिखे हुए थे, जिसने सुरक्षा बलों के कान खड़े कर दिए हैं।
कॉल डिटेल खंगालने में जुटीं देश की जांच एजेंसियां
इस गंभीर मामले में फिलहाल किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। सुरक्षा एजेंसियां पर्ची पर लिखे सभी पांचों मोबाइल नंबरों की पूरी कुंडली और कॉल डिटेल (CDR) खंगालने में जुट गई हैं। इसकी गहन तकनीकी जांच की जा रही है ताकि सीमा पार के कनेक्शन का पता लगाया जा सके।
अधिकारियों का मानना है कि इन नंबरों का संबंध किसी बड़े आतंकी नेटवर्क या उनके मददगार स्लीपर सेल से हो सकता है। अतीत में भी नियंत्रण रेखा (LoC) के पास ऐसे कई सुराग मिले हैं, जिनकी मदद से घुसपैठियों और आतंकियों के मददगारों के सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने में बड़ी सफलता मिली थी।
एलओसी से सटे पुंछ में सुरक्षा घेरा हुआ बेहद सख्त
पुंछ जिला भौगोलिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, क्योंकि इसकी सीमाएं सीधे नियंत्रण रेखा से सटी हुई हैं। सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए भारतीय सेना और स्थानीय पुलिस लगातार इस पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाती है।
हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने इस पूरे बेल्ट में अपनी निगरानी और तलाशी अभियानों को पहले से कहीं ज्यादा तेज कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह पैकेट किसी बड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा है या नहीं।
Author: Raj Thakur


