हिमकेयर योजना में 110 करोड़ का महाघोटाला, विजिलेंस के रडार पर आए 98 अस्पताल, अफसरों पर भी गिरेगी गाज

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना ‘हिमकेयर’ में करोड़ों रुपये का बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की शुरुआती जांच में प्रदेश के 98 निजी अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं। इन अस्पतालों पर फर्जी बिल बनाकर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाने का आरोप है।

निजी अस्पतालों ने इलाज के नाम पर की बड़ी जालसाजी

विजिलेंस ब्यूरो के खुलासे के अनुसार इन निजी अस्पतालों ने सरकारी पैसा ऐंठने के लिए मरीजों के फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए। जिन सामान्य बीमारियों के इलाज या ऑपरेशनों का खर्च महज कुछ हजार रुपये था, उनके बदले सरकार को लाखों रुपये के फर्जी बिल भेजे गए।

जांच एजेंसी को दस्तावेजों और अस्पतालों द्वारा पेश किए गए बिलों में भारी अंतर मिला है। कई ऐसे उपचारों के भुगतान के लिए आवेदन किए गए, जिनका अस्पताल के भीतर कोई प्रमाण नहीं था। कई अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती किए बिना ही उनके नाम पर लाखों का क्लेम वसूल लिया।

अस्पतालों ने मुनाफा कमाने के लिए एक ही मरीज के नाम पर कई बार बिल बनाकर सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। इसके अलावा मरीजों को बिना जरूरत के आईसीयू (ICU) में भर्ती दिखाया गया। पैसे हड़पने के लालच में कई मरीजों की अनावश्यक सर्जरी करने के मामले भी पकड़े गए हैं।

बाजार में बेहद कम दाम में मिलने वाली दवाइयों और टेस्ट के बिल हिमकेयर योजना में कई गुना बढ़ाकर दिखाए गए। कुछ मामलों में तो एक ही मरीज के इलाज का क्लेम केंद्र की ‘आयुष्मान भारत’ और राज्य की ‘हिमकेयर योजना’ दोनों जगह से एक साथ उठाने का खेल खेला गया।

सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए रोका करोड़ों का भुगतान

इस महाघोटाले के उजागर होने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट पूरा होने तक राज्य के कई बड़े निजी अस्पतालों के करोड़ों रुपये के क्लेम का भुगतान तुरंत रोक दिया है। स्वास्थ्य विभाग अब बेहद फूंक-फूंककर कदम उठा रहा है।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग और विजिलेंस विभाग को सभी संदिग्ध दावों की बारीकी से जांच करने के आदेश दिए गए हैं। विजिलेंस ब्यूरो अब इन 98 निजी अस्पतालों के प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की पूरी तैयारी में है। जांच पूरी होने तक कोई भुगतान नहीं होगा।

जांच के दायरे में आए स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी

इस करीब 110 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की आंच अब स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों तक पहुंच गई है। विजिलेंस ने विभाग से विस्तृत प्रशासनिक रिपोर्ट तलब की है। एजेंसी अपनी मुख्य जांच रिपोर्ट का इस विभागीय आंकड़े से गहन मिलान करेगी।

इसके बाद उन दोषी अधिकारियों पर भी सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा, जिनकी मिलीभगत से यह गोरखधंधा वर्षों से चल रहा था। सुक्खू सरकार ने साफ किया है कि जनहित की इस जनकल्याणकारी योजना के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

Author: Sunita Gupta

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