Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से स्वास्थ्य विभाग की एक बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई है। नंदग्राम थाना क्षेत्र में दुष्कर्म का शिकार हुई चार साल की मासूम बच्ची के इलाज में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों में से एक, खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर सेंटर, बिना किसी वैध पंजीकरण के पिछले छह महीनों से धड़ल्ले से चल रहा है।
तीनों चिकित्सा पद्धतियों के पंजीकरण गायब
इस कथित अस्पताल में एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी, तीनों पद्धतियों से मरीजों का इलाज करने का बड़ा दावा किया जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी कार्यालय और जिला होम्योपैथिक कार्यालय, तीनों में से किसी भी विभाग में इस अस्पताल का कोई मौजूदा पंजीकरण नहीं है।
नवीनीकरण का आवेदन पहले ही हो चुका है निरस्त
इस अस्पताल के पंजीकरण की वैध अवधि नवंबर 2025 में ही पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इसके बाद प्रबंधन ने नवीनीकरण के लिए आवेदन तो किया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने उसे सीधे निरस्त कर दिया। विभाग ने आवेदन निरस्त करने के कारणों को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है। फिलहाल अस्पताल का दूसरा आवेदन लंबित बताया जा रहा है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अशोक राना और जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. पंकज त्यागी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उनके विभागों में इस अस्पताल का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। वहीं, एसीएमओ डॉ. अमित विक्रम ने बताया कि सरकारी पोर्टल पर वर्तमान में इस सेंटर का कोई पंजीकरण दर्ज नहीं है।
मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से किया किनारा
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपी अस्पतालों को पीड़ित बच्ची के लिए स्वेच्छा से मुआवजा राशि तय करने का कड़ा आदेश दिया था। कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि ऐसा न होने पर अदालत खुद राशि तय करेगी। इसके बावजूद, सेंट जोसेफ हॉस्पिटल के प्रबंधक ललित गोयल और खजान सिंह सेंटर के निदेशक संदीप त्यागी ने कोर्ट के आदेश की जानकारी होने से ही साफ इनकार कर दिया है।
Author: Ajay Mishra


