Bengaluru News: भारत की राजनीति में विपक्षी खेमे में टूट की खबरों के बीच कर्नाटक से बड़ी खबर आ रही है। यहां केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन को वर्षों बाद पहला तगड़ा झटका लगा है। विधान परिषद चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने पांच सीटों पर शानदार और आरामदायक जीत दर्ज की है।
गुप्त मतदान में भीतरघात, गद्दारों की खोज में जुटा एनडीए
गुरुवार को घोषित हुए नतीजों के बाद विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन के खेमे में हड़कंप मच गया है। चुनाव के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि विपक्ष के कई विधायकों ने पाला बदला है। उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की, जिसके बाद अब एनडीए नेता गद्दारों की तलाश में जुटे हैं।
चुनाव में गद्दारी के पुख्ता सबूत तो मिल चुके हैं, लेकिन गुप्त मतदान होने के कारण दोषियों का सुराग नहीं मिल पा रहा है। इस अनिश्चितता ने गठबंधन के भीतर अविश्वास को और गहरा कर दिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने गद्दारों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
कांग्रेस को मिले उम्मीद से ज्यादा वोट, जेडीएस-बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस उम्मीदवार विनय कार्तिक सबसे ज्यादा 32 वोट पाकर विजयी घोषित हुए। यह संख्या जीत के कोटे और कांग्रेस विधायकों की अपनी ताकत से काफी ज्यादा थी। वोटों के इस गणित से अंदाजा लगाया जा रहा है कि उन्हें भाजपा और जेडीएस के कम से कम एक दर्जन विधायकों का साथ मिला है।
भाजपा नेताओं का दावा है कि उनके खेमे से केवल तीन विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेडीएस के कम से कम 8 विधायकों ने कांग्रेस का समर्थन किया। हालांकि, जेडीएस नेताओं ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बाकी की पूरी मदद भाजपा विधायकों से मिली है।
शक के घेरे में आए दिग्गज, सिद्धारमैया सरकार उत्साहित
इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद जेडीएस के जीटी देवगौड़ा, एमआर मंजूनाथ और भाजपा के दिग्गज नेता रमेश जारकीहोली, बीपी हरीश, एम चंद्रप्पा व एचके सुरेश जांच के दायरे में आ गए हैं। हालांकि, इन सभी बड़े नेताओं ने क्रॉस-वोटिंग के आरोपों से साफ इनकार किया है।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद इसे बड़ी चुनावी जीत बताते हुए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार काफी उत्साहित दिखे। हालांकि, उन्होंने इस कयासबाजी को हवा न देते हुए हल्के अंदाज में कहा कि उन्हें कोई अंदाजा नहीं है कि किस विपक्षी विधायक ने कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की है।
जेडीएस और बीजेपी नेतृत्व पर बढ़ा भारी दबाव
यह चुनावी नतीजा भाजपा और जेडीएस दोनों के लिए आने वाले दिनों में बड़ी मुसीबतें खड़ी कर सकता है। पहले से ही संकट से जूझ रही जेडीएस के लिए यह हार बड़ा झटका है। अब पार्टी आलाकमान को अपने भीतर पनप रहे भारी असंतोष पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
भाजपा के लिए भी यह परिणाम बेहद चिंताजनक है। इस बगावत से पार्टी के भीतर मौजूद असंतुष्ट गुट को भारी बल मिलेगा। विरोधी नेता अब प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को पद से हटाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव और तेज कर सकते हैं, जिससे सियासी हलचल बढ़ गई है।
Author: Suresh Gowda


