Ayodhya News: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक मामला पब्लिक होने से काफी पहले ही राम मंदिर ट्रस्ट को इस हेराफेरी की पूरी जानकारी मिल चुकी थी। इसके बावजूद केस दर्ज कराने में बीस दिन की लंबी देरी की गई।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार पांच जून को ही ट्रस्ट के आला पदाधिकारियों ने सिक्योरिटी एजेंसी एसआईएस के सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक्शन लिया था। उन्होंने आरोपियों के घरों पर दबिश देकर करीब अट्ठावन लाख रुपये की भारी नकदी उसी समय रिकवर कर ली थी।
लाखों रुपये की रिकवरी के बाद भी छिपाई गई बात
इसके बाद शेष बची रकम आरोपियों ने अपने बैंक खातों से निकालकर आठ जून तक सीधे ट्रस्ट को वापस सौंप दी थी। कुल मिलाकर लगभग 79.85 लाख रुपये की शत-प्रतिशत रिकवरी होने के बावजूद करीब बीस दिनों तक पुलिस थाने में कोई ऑफिशियल एफआईआर दर्ज नहीं करवाई गई थी।
इस रहस्यमयी देरी की वजह से अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगलियां उठ रही हैं। विशेषकर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सीनियर सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर भी आम जनता और राजनीतिक हलकों में तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं।
निजी वाहनों से आरोपियों के घर पहुंचे थे पदाधिकारी
चढ़ावे की काउंटिंग ड्यूटी में तैनात कुछ कर्मचारी बहुत लंबे समय से इस बड़ी हेराफेरी को अंजाम दे रहे थे। जांच के दौरान मुख्य संदिग्ध टिन्नू यादव पर सबसे अधिक शक जताया जा रहा है। उसके पास मंदिर के चढ़ावे में आई बहुमूल्य धातुएं मिलने की बात भी सामने आ रही है।
इस गोपनीय रिकवरी ऑपरेशन के दौरान ट्रस्ट की किसी भी ऑफिशियल गाड़ी का इस्तेमाल जानबूझकर नहीं किया गया था। पदाधिकारी केवल अपनी प्राइवेट कारों से आरोपियों के घर पहुंचे थे। दरअसल ट्रस्ट की गाड़ियों के मूवमेंट पर लॉगबुक में प्रविष्टि दर्ज करना बेहद अनिवार्य होता है।
एसआईटी जांच के बाद चंपत राय का इस्तीफा
इस पूरे घोटाले की भनक लगते ही समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता पवन पांडे ने पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव को महत्वपूर्ण इनपुट दिए थे। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सात जून को सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट शेयर कर इस गंभीर मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा सहित करीब चालीस से अधिक लोगों की भूमिका को पूरी तरह संदिग्ध पाया गया है।
इस आंतरिक रिपोर्ट के आने के तुरंत बाद पच्चीस जून को आठ नामजद कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसी रात सभी को गिरफ्तार कर लिया। इसके अगले ही दिन छब्बीस जून को चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।

