Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर में छात्रों ने एक अनोखा आविष्कार किया है। राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों ने एक ‘सोनिक फायर एक्सटिंग्विशर’ बनाया है। यह मशीन बिना पानी या किसी केमिकल के सिर्फ आवाज से आग बुझा देती है। इस स्वदेशी तकनीक ने बड़े संस्थानों और वन विभाग का ध्यान खींचा है। कॉलेज प्रशासन ने अब इस खास तकनीक के पेटेंट की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। यह उपकरण भविष्य में अग्निशमन क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति ला सकता है।
महंगे उपकरणों को पानी और केमिकल से बचाएगी तकनीक
प्रोजेक्ट लीडर रजत सिंह ने इस मशीन के काम करने का तरीका बताया है। उन्होंने कहा कि अक्सर फैक्ट्रियों में महंगे इलेक्ट्रिकल पैनल होते हैं। आग लगने पर पारंपरिक तरीके इस्तेमाल करने से मशीनें पूरी तरह खराब हो जाती हैं। पानी और केमिकल से होने वाले इसी नुकसान को रोकने के लिए यह तकनीक बनाई गई है। छात्रों की इस टीम ने ध्वनि तरंगों पर आधारित इस बेहद आधुनिक और असरदार तकनीक पर कड़ी मेहनत के साथ काम किया है।
ऑक्सीजन को रोककर आग बुझाती हैं ध्वनि तरंगें
छात्रों ने इस मशीन में विशेष माइक्रो-कंट्रोलर का इस्तेमाल किया है। इसके साथ ही एक खास प्रोग्रामिंग कोड भी सेट किया गया है। यह मशीन एक निश्चित फ्रीक्वेंसी वाली तेज ध्वनि पैदा करती है। यह ध्वनि तरंग आग के चारों ओर मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क को पूरी तरह तोड़ देती है। ऑक्सीजन न मिलने के कारण भयंकर आग तुरंत बुझ जाती है। यह एक पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल और बहुत ही सुरक्षित आधुनिक फायर तकनीक है।
आठ हजार रुपये है कीमत और रिफिलिंग का झंझट खत्म
इस पोर्टेबल फायर एक्सटिंग्विशर को बनाने में करीब सात से आठ हजार रुपये का खर्च आया है। सबसे खास बात यह है कि इसे बार-बार रिफिल कराने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। इसका कुल वजन भी केवल तीन से पांच किलोग्राम के बीच है। कम वजन होने के कारण इसे पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से ले जाया जा सकता है। यह उपकरण दुर्गम जंगलों में लगने वाली भयंकर आग को बुझाने में बहुत ही मददगार साबित होगा।
वन विभाग और बड़े आईआईटी संस्थानों ने दिखाई दिलचस्पी
इस स्वदेशी तकनीक की चर्चा अब पूरे देश में जोर-शोर से हो रही है। देश के कई प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों और बड़ी कंपनियों ने इस मॉडल में अपनी गहरी रुचि दिखाई है। स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों ने भी कॉलेज आकर इस मशीन का बारीकी से निरीक्षण किया है। वर्तमान में जंगलों की आग बुझाने के लिए कोई पोर्टेबल उपकरण मौजूद नहीं है। ऐसे में यह नया आविष्कार वन विभाग के लिए एक बहुत बड़ा तकनीकी समाधान बन सकता है।
सेंसर से खुद चालू होकर आग बुझाएगा ऑटोमैटिक वर्जन
इस प्रोजेक्ट के मेंटर अवनीश पॉल ने इसके भविष्य की योजनाएं साझा की हैं। उन्होंने बताया कि टीम अब इसके ‘ऑटोमैटिक सोनिक वर्जन’ पर काम कर रही है। इसके पेटेंट की फाइल तैयार की जा रही है। यह नया सेंसर-आधारित मॉडल घरों के लिए बहुत उपयोगी होगा। अगर घर में कोई मौजूद नहीं है और आग लग जाती है, तो यह सेंसर खुद आग को पहचान लेगा। यह मशीन अपने आप चालू होकर तुरंत भयंकर आग को बुझा देगी।
कॉलेज प्रशासन देगा छात्रों को पूरी आर्थिक मदद
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष राजेश चौधरी ने छात्रों की इस बड़ी सफलता की बहुत तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह कॉलेज के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि है।
- इस शानदार प्रोजेक्ट को छठे सेमेस्टर के इंजीनियरिंग छात्रों ने तैयार किया है।
- शोध को आगे और बेहतर बनाने के लिए ‘स्टूडेंट वेलफेयर फंड’ से मदद मिलेगी।
- कॉलेज प्रशासन सभी जरूरी तकनीकी संसाधन भी टीम को तुरंत उपलब्ध कराएगा।
- भारतीय परिस्थितियों के अनुसार बना यह पोर्टेबल मॉडल पूरी दुनिया में बिल्कुल अनूठा है।
आधुनिक तकनीक से अग्निशमन विभाग को मिलेगी बड़ी राहत
यह सोनिक फायर तकनीक अग्निशमन विभाग के लिए एक बेहतरीन वरदान साबित हो सकती है। तंग गलियों और घनी आबादी वाले इलाकों में दमकल की बड़ी गाड़ियां आसानी से नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसे मुश्किल हालात में यह छोटी और हल्की मशीन बहुत ही कारगर सिद्ध होगी। इसे कंधे पर टांग कर आसानी से किसी भी तंग जगह पर ले जाया जा सकता है। इससे आग पर जल्दी काबू पाने में लगने वाला समय काफी हद तक कम हो जाएगा।


