Delhi News: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। हालांकि आयोग की अंतिम सिफारिशें आने में अभी करीब एक साल का लंबा वक्त बाकी है। लेकिन इससे पहले फिटमेंट फैक्टर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कर्मचारी संगठनों की बड़ी मांग से बढ़ी सरकार की चिंता
विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की तरफ से फिटमेंट फैक्टर को 3 से बढ़ाकर 5.28 तक करने की लगातार मांग की जा रही है। बाजार के वित्तीय जानकारों का साफ मानना है कि मौजूदा आर्थिक हालातों में सरकार के लिए इतनी भारी वेतन वृद्धि को मंजूरी देना बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला है।
पेंशन मामलों के वरिष्ठ विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों की यह मांग देश की मौजूदा आर्थिक हकीकत से परे है। सरकार पर पहले से ही नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन योजनाओं के चलते वित्तीय देनदारियों का भारी दबाव लगातार बना हुआ है।
फिटमेंट फैक्टर कम रहने पर भी खजाने पर पड़ेगा भारी बोझ
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल के मुताबिक अगर सरकार फिटमेंट फैक्टर को घटाकर 2 के आसपास भी रखती है, तो भी कुल सैलरी खर्च में भारी इजाफा होगा। इस मामूली बढ़ोतरी से भी सरकारी खजाने पर सालाना 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ना तय है।
इसे एक साधारण गणित से समझा जा सकता है। यदि किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है और उसे 60% महंगाई भत्ता मिलाकर फिलहाल ₹160 मिल रहे हैं। नए फिटमेंट फैक्टर के तहत बेसिक पे दोगुनी यानी ₹200 होने पर उसकी सैलरी में ₹40 की बढ़ोतरी होगी, जो सीधे तौर पर 25% का शुद्ध इजाफा है।
करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर टिकेगा वित्तीय गणित
मौजूदा समय में केंद्र सरकार के करीब 32 से 33 लाख कर्मचारी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के दायरे में आते हैं। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक पे और डीए का 10 फीसदी हिस्सा योगदान करते हैं, जबकि सरकार की तरफ से 14 फीसदी का योगदान दिया जाता है। इस मद में सरकार हर महीने ₹3,000 करोड़ दे रही है।
वहीं दूसरी तरफ यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत सरकार का मासिक योगदान 18.5 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। नए वेतन आयोग के सामने केवल वेतन और पेंशन बढ़ाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि 55 लाख सक्रिय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के एनपीएस और यूपीएस फंड की भारी-भरकम कटौती का बोझ संभालना भी बड़ी चुनौती है।
Rajesh Kumar

