चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट: निवेशकों के करोड़ों डूबे, क्या अब खरीदारी का सही समय है?

Business News: वैश्विक तनाव और बाजार में मुनाफावसूली के चलते भारतीय सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बावजूद चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार, 24 मार्च को बाजार खुलते ही चांदी के दाम धड़ाम से नीचे गिर गए, जिससे निवेशकों में बेचैनी साफ देखी जा सकती है।

दिल्ली के स्पॉट मार्केट में चांदी की कीमतों ने सबको चौंका दिया है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में चांदी ₹10,500 सस्ती होकर ₹2,30,000 प्रति किलोग्राम पर आ गई है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले कारोबारी सत्र में यही कीमत ₹2,40,500 पर टिकी हुई थी।

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने भी गिरावट की पुष्टि की है। मंगलवार सुबह तक चांदी का भाव ₹2,19,260 प्रति किलो तक पहुंच गया। गुडरिटर्न्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो वहां भी लगभग ₹15,000 की बड़ी कटौती देखने को मिली है, जो आम खरीदारों के लिए राहत भरी खबर हो सकती है।

MCX और वायदा बाजार का हाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी चांदी का भविष्य लाल निशान में नजर आ रहा है। चांदी का वायदा भाव 0.59% यानी ₹1,349 की गिरावट के साथ ₹2,25,423 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा है। सोमवार को स्थिति और भी गंभीर थी, जब कीमतें ₹20,409 तक गिरकर ₹2,06,363 के स्तर पर पहुंच गई थीं।

बाजार के जानकार इस गिरावट को एक बड़े ‘करेक्शन’ के रूप में देख रहे हैं। इसी साल 29 जनवरी को चांदी ने ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम का अपना ऑल टाइम हाई छुआ था। अब वहां से कीमतें लगभग आधी रह गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर चांदी 6% टूटकर 63 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई है।

भारत में चांदी की कीमतें कई बाहरी और आंतरिक कारकों पर निर्भर करती हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय रुझान, डॉलर-रुपया विनिमय दर और सबसे महत्वपूर्ण ‘इंपोर्ट ड्यूटी’ की भूमिका होती है। ज्वेलर्स अंततः IBJA द्वारा जारी बेस रेट में अपना मेकिंग चार्ज और GST जोड़कर ग्राहकों को अंतिम दाम बताते हैं।

प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा भाव

देश के अधिकांश बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में चांदी ₹2,30,000 प्रति किलोग्राम पर बिक रही है। हालांकि, चेन्नई में यह ₹2,35,000 और नासिक में ₹2,44,900 के भाव पर दर्ज की गई है। यह अंतर स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत की वजह से आता है।

निवेशकों के लिए यह दौर काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। जहां एक तरफ युद्ध की आहट से बाजार में तेजी की उम्मीद थी, वहीं मुनाफावसूली ने कीमतों को नीचे धकेल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता के बीच बाजार अभी और गोते खा सकता है, इसलिए निवेश से पहले सावधानी जरूरी है।

चांदी की इस उठापटक ने मध्यम वर्ग के उन लोगों को मौका दिया है जो शादी-ब्याह के लिए खरीदारी की योजना बना रहे थे। भारी भरकम ऑल टाइम हाई से नीचे आने के बाद, शोरूम्स में ग्राहकों की पूछताछ बढ़ने की संभावना है। आने वाले कुछ दिन बाजार की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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