UNSC में भारत का गरजता प्रहार: ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ पर पाकिस्तान को लताड़ा, सेना के ‘तख्तापलट’ की खोली पोल!

World News: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया है। भारतीय प्रतिनिधि ने सोमवार को स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद द्वारा अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय आतंकी समूहों को ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहना सिर्फ एक घिनौना दुष्प्रचार है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने ‘अफगानिस्तान की स्थिति’ पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में पाकिस्तान को बुरी तरह घेरा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान धार्मिक शब्दावली की आड़ में आधिकारिक रूप से भारत के खिलाफ गलत सूचना फैलाने का अभियान चला रहा है।

पाकिस्तान की नफरत फैलाने वाली ‘संगठित फैक्टरी’ बेनकाब

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार वहां की सरकार ने बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को पिछले वर्ष ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ करार दिया था। पाकिस्तान ने बिना कोई सबूत दिए यह झूठा आरोप लगाया था कि ये सभी खतरनाक संगठन सीधे भारत के इशारे पर आतंकवाद फैला रहे हैं।

राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने इसे पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान से संचालित नफरत की एक बहुत बड़ी ‘संगठित फैक्टरी’ बताया। उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र उद्देश्य पाकिस्तानी नागरिकों को भारत के खिलाफ हमेशा शत्रुता की स्थिति में रखना है ताकि वहां की सेना सत्ता पर मजबूत पकड़ बना सके।

भारतीय दूत ने आगे कहा कि इस दुष्प्रचार के जरिए पाकिस्तान अपने राष्ट्रीय संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। ऐसा करके वे अपनी जनता का ध्यान देश की मुख्य राजनीतिक और कंगाली जैसी आर्थिक समस्याओं से भटकाने का पुराना खेल खेल रहे हैं।

27वें संविधान संशोधन के जरिए सेना का ‘वास्तविक तख्तापलट’

भारतीय दूत ने पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ’27वें संविधान संशोधन के जरिये सेना द्वारा किया गया वास्तविक तख्तापलट इसका सबसे हालिया उदाहरण है।’ उन्होंने पिछले वर्ष पाकिस्तानी संसद द्वारा पारित विवादित संविधान संशोधन का खुलकर उल्लेख किया।

इस नए संशोधन के तहत वहां ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) का एक शक्तिशाली पद सृजित किया गया था। इसके तुरंत बाद फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पाकिस्तान का पहला सीडीएफ नियुक्त किया गया, जिससे लोकतांत्रिक सरकार पूरी तरह सेना के दबाव में आ गई है।

अफगानिस्तान पर हवाई हमलों की निंदा और पाखंड का पर्दाफाश

यूएनएससी की इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय दूत ने अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा किए गए सैन्य हवाई हमलों की भी कड़ी निंदा की। पर्वतनेनी ने कहा कि किसी नरसंहार को सैन्य आतंकवाद-रोधी अभियान का रूप देने से अपराधी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।

उन्होंने पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा कि आम नागरिकों की बेरहमी से हत्या करना, उन्हें अपंग बनाना और मासूम बच्चों को अनाथ करना किसी भी लिहाज से आतंकवाद-रोधी कार्रवाई नहीं है। रमजान के पवित्र महीने में हवाई हमले करके अंतरराष्ट्रीय कानून की बात करना पाखंड का सबसे सटीक उदाहरण है।

Pallavi Sharma

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