Delhi News: भारत के टेलीकॉम सेक्टर में इंटरनेट की दुनिया का एक बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दिग्गज टेलीकॉम कंपनी एयरटेल (Airtel) ने अपने कुछ चुनिंदा पोस्टपेड ग्राहकों के लिए एक ऐसा नया प्लान पेश किया है, जिसमें उन्हें बाकी आम यूजर्स की तुलना में बेहद तेज और बेहतर नेटवर्क एक्सेस दिया जा रहा है।
कंपनी का इस अनोखे प्लान को लेकर साफ कहना है कि यह उनकी एक प्रीमियम सर्विस है। हालांकि, प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम कंपनियां और बाजार के कई बड़े तकनीकी विशेषज्ञ इसे ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ (Net Neutrality) के उल्लंघन के नजरिए से देख रहे हैं। इसी वजह से अब यह गंभीर मामला नियामक संस्थाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है एयरटेल का नया प्रायोरिटी नेटवर्क (Priority Network) प्लान?
एयरटेल ने अपने पोस्टपेड ग्राहकों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू की है, जिसके तहत यूजर्स को भारी नेटवर्क कंजेशन यानी भीड़भाड़ के दौरान इंटरनेट इस्तेमाल में प्राथमिकता मिलेगी। जब किसी विशेष इलाके में नेटवर्क पर बहुत ज्यादा लोड होगा, तब इस वीआईपी प्लान के यूजर्स को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले अधिक स्पीड मिलेगी।
इंटरनेट की दुनिया में क्यों हो रही है वीआईपी लेन और नॉर्मल लेन की तुलना?
इस प्लान को कई विशेषज्ञ ‘वीआईपी लेन’ और ‘नॉर्मल लेन’ वाले भेदभावपूर्ण मॉडल के रूप में भी देख रहे हैं। इस नए प्लान को लेकर मुख्य विवाद यही है कि यदि कुछ अमीर यूजर्स को नेटवर्क पर विशेष प्राथमिकता दी जाती है, तो बाकी के करोड़ों सामान्य ग्राहकों की इंटरनेट स्पीड और कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
एयरटेल का बड़ा दावा: कुल यूजर बेस का सिर्फ 4 प्रतिशत हैं पोस्टपेड ग्राहक
बढ़ते विवाद के बीच एयरटेल ने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया है कि उसके पोस्टपेड ग्राहक कुल यूजर बेस का केवल 4 प्रतिशत ही हैं। साथ ही कंपनी के एडवांस 5जी (5G) नेटवर्क की सिर्फ 38 फीसदी क्षमता का ही इस समय इस्तेमाल हो रहा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सामान्य यूजर्स को घाटा होगा।
जानिए आखिर क्या कहते हैं भारतीय नियामक संस्था ट्राई (TRAI) के कड़े नियम
भारत में नेट न्यूट्रैलिटी का मूल सिद्धांत यही कहता है कि देश में सभी इंटरनेट ट्रैफिक के साथ हमेशा एक समान व्यवहार किया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि किसी खास वेबसाइट, ऐप या पैसे वाले यूजर को कोई विशेष प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए। यही वजह है कि सरकार इस पूरे मामले पर पैनी नजर रख रही है।
प्रतिद्वंदी कंपनी रिलायंस जियो (Jio) ने एयरटेल के इस कदम पर उठाए सवाल
एयरटेल के इस बड़े कदम के बाद अब अन्य प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम कंपनियों ने भी कड़े सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। इस पूरे मामले पर रिलायंस जियो (Jio) का कहना है कि यह नई तकनीक उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करने से पहले सरकार और नियामकों के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार करना चाहिए था।
कंपनियों का साफ तर्क है कि देश में किसी भी नई तकनीकी व्यवस्था को लागू करते समय नेट न्यूट्रैलिटी के पवित्र सिद्धांतों का पूरी तरह पालन होना ही चाहिए। फिलहाल एयरटेल अपने इस मॉडल को सुरक्षित और बेहद सीमित प्रभाव वाला बता रही है, लेकिन आने वाले समय में नियामक संस्थाओं का अंतिम फैसला देखना काफी दिलचस्प होगा।
Author: Mohit


