शाहजहांपुर में सवा करोड़ की सरकारी जमीन का ‘महा-फर्जीवाड़ा’: मां-बेटे ने मिलकर बेच डाली निगम की दुकानें, बेटी को दी दान

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक बेहद हैरान करने वाला बड़ा सरकारी जमीन फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां नगर निगम (तत्कालीन नगर पालिका) द्वारा करीब 62 वर्ष पहले व्यावसायिक गतिविधि के लिए किराये पर दी गई बेसकीमती सरकारी भूमि को अवैध रूप से बेचने और दान करने का गंभीर मामला उजागर हुआ है।

इस महा-फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही नगर निगम के संपत्ति विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग की ओर से दिलाजाक मुहल्ला निवासी सीमा रानी और उनके बेटे विनय चावला के खिलाफ सदर बाजार थाने में धोखाधड़ी की नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है। आरोपियों पर सवा करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति खुर्द-बुर्द करने का आरोप है।

किराये की जमीन को पैतृक बताकर रचा खेल

नगर निगम के प्रभारी अधिकारी संपत्ति विपिन कुलदीप सिंह द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, शहर के खास उत्तरी अंदर चुंगी स्थित गाटा संख्या 4456 और 4457 की भूमि म्युनिसिपल बोर्ड के प्रबंधन में दर्ज है। इस भूखंड को पांच अप्रैल 1964 को केवल कृष्ण नामक व्यक्ति को किराये पर आवंटित किया गया था।

केवल कृष्ण की मृत्यु के बाद यह जमीन कानूनी तौर पर उनके वारिसों कमल कुमार, और फिर आठ सितंबर 2016 को सीमा रानी व उनके पुत्र विनय कुमार चावला के नाम किरायेदारी में ट्रांसफर हुई थी। नियमों के मुताबिक, किरायेदार होने के नाते मां-बेटे के पास इस बेशकीमती सरकारी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने का कोई विधिक अधिकार नहीं था।

दुकानें बेचीं और बेटी को दान कर दी करोड़ों की जमीन

आरोप है कि सीमा रानी और विनय ने नियमों को ताक पर रखकर मार्च 2022 में इस सरकारी भूमि का 16.36 वर्ग मीटर हिस्सा और उस पर बनी दुकानें रामनगर कॉलोनी निवासी अपरम पाहूजा को 13 लाख रुपये में बेच दीं। बात यहीं नहीं रुकी, आरोपियों ने इसके बाद सरकारी जमीन का एक और बड़ा हिस्सा अपने करीबियों के नाम ट्रांसफर कर दिया।

मुख्य आरोपी सीमा रानी ने अगस्त 2022 में इसी भूखंड से 306.69 वर्ग मीटर जमीन अपनी दक्षिण दिल्ली निवासी पुत्री मिनी सभरवाल को बकायदा दान पत्र (Gift Deed) के जरिए हस्तांतरित कर दी। सरकारी अभिलेखों और सर्किल रेट के अनुसार, इस दान की गई प्राइम लोकेशन की जमीन की कुल सरकारी कीमत एक करोड़ 22 लाख 67 हजार छह सौ रुपये आंकी गई है।

नगर आयुक्त की जांच के बाद पुलिस का कड़ा एक्शन

प्रभारी अधिकारी ने बताया कि इस गंभीर गड़बड़ी को लेकर विभाग द्वारा जून 2023 में आरोपियों को दो बार डाक से नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच कराई, जिसमें धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर तत्काल एफआईआर के निर्देश दिए गए।

सदर बाजार थाने के प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। दूसरी तरफ, आरोपी विनय चावला ने सभी आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए दावा किया है कि यह उनकी पैतृक संपत्ति है और वे पुलिस जांच में अपने सभी वैध दस्तावेज पेश कर चुके हैं।

Author: Ajay Mishra

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