Prayagraj News: उत्तर प्रदेश की पावन संगम नगरी प्रयागराज में इन दिनों युवाओं के बीच अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का एक अनोखा क्रेज देखा जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब बड़े महानगरों की कृत्रिम चमक-दमक पूरी तरह से फीकी पड़ रही है।
अब इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर विदेशी लाइफस्टाइल को शेयर करना स्टेटस सिंबल नहीं माना जाता है। प्रयागराज की नई पीढ़ी यानी जेन जी के युवा इंटरनेट को अपनी अनूठी स्थानीय पहचान, विरासत और सभ्यता को पूरी दुनिया के सामने लाने का एक बड़ा जरिया बना रहे हैं।
इंटरनेट पर छाया माई सिटी माई आइडेंटिटी का नया क्रेज
शहर के लड़के-लड़कियों के बीच इन दिनों ‘माई सिटी, माई आइडेंटिटी’ का नया डिजिटल कैंपेन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसके तहत सभी क्रिएटर्स अपने जिले के खानपान, खास बोली, पारंपरिक त्योहारों और ऐतिहासिक धरोहरों को गर्व के साथ इंटरनेट पर दिखा रहे हैं।
आजकल इंस्टाग्राम रील्स और छोटे व्लॉग्स के माध्यम से प्रयागराज की असल खूबसूरती देश-विदेश के कोने-कोने तक पहुंच रही है। पढ़ाई और कॉर्पोरेट जॉब के सिलसिले में बाहर रहने वाले प्रवासी युवा भी इस अनोखे अभियान के जरिए लगातार अपनी मिट्टी से जुड़े हुए हैं।
सोशल मीडिया बायो में प्राउड प्रयागी लिखने का बढ़ा चलन
युवाओं का स्पष्ट मानना है कि सोशल मीडिया अब सिर्फ टाइमपास या मनोरंजन का साधन नहीं है। यह अपने जन्मस्थान के प्रति अगाध प्रेम व्यक्त करने का सबसे दमदार जरिया बन चुका है। युवा क्रिएटर्स अपने बायो में प्राउड प्रयागी लिखना पसंद कर रहे हैं।
कोई सुबह के समय शांत संगम तट की अलौकिक सुंदर रील्स बना रहा है, तो कोई भव्य गंगा आरती को कैमरे में कैद कर रहा है। कुछ लोग लोकनाथ और चौक के मशहूर स्ट्रीट फूड, नेतराम की स्वादिष्ट मिठाइयों और पुराने इलाहाबाद के अनछुए पहलुओं को साझा कर रहे हैं।
स्थानीय बोली और स्लैंग का इस्तेमाल कर रहे क्रिएटर्स
आजकल यूनिवर्सिटी कैंपस व्लॉग्स, सरस्वती घाट रील्स और बोट राइड वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं। नई उम्र के इंफ्लुएंसर्स अपनी वीडियो क्लिप्स में स्थानीय बोली, खास लहजे और मजेदार मीम्स का उपयोग कर रहे हैं, जिसे दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ता बदलाव केवल एक अस्थाई फैशन नहीं है। यह वर्तमान पीढ़ी के अपनी सांस्कृतिक विरासत से गहरे लगाव को दर्शाता है। इस सराहनीय प्रयास से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी इतिहास को बेहतर समझेंगी।
Author: Ajay Mishra


