Uttar Pradesh News: बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने एक बार फिर तीखा और बेहद विवादित बयान दिया है। उनके इस नए धमाके के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है। उन्होंने बलरामपुर के एक कार्यक्रम में खुलकर अपनी भड़ास निकाली है।
पीसीएस अधिकारी ने अपने संबोधन में राजनीतिक दलों के आपसी रिश्तों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी को सीधे सत्ताधारी दल भाजपा की सी टीम करार दिया। उन्होंने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच दिखने वाला टकराव सिर्फ एक दिखावा है।
अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि जिस संगठन को सार्वजनिक मंचों से राष्ट्रविरोधी बताया जाता है, उसे असल में अंदरूनी संरक्षण मिलता है। उन्होंने सीजेपी नेता अभिजीत दीपके के भव्य स्वागत और उनके कार्यक्रमों को आसानी से मिली सरकारी अनुमति का सीधा हवाला भी दिया।
राम मंदिर चंदे की पारदर्शिता और एनकाउंटर नीति पर सवाल
निलंबित अधिकारी ने राम मंदिर में आने वाली भारी दान राशि के प्रबंधन पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के उपयोग में पूरी पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है।
हालांकि इस मामले पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी स्थिति साफ की है। ट्रस्ट के मुताबिक सभी वित्तीय लेन-देन की नियमित आंतरिक ऑडिट प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है। अब तक जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।
इसके साथ ही पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने पुलिस की एनकाउंटर नीति पर भी उंगली उठाई। उन्होंने साफ कहा कि कानून के राज में हर प्रशासनिक कार्रवाई तय नियमों के तहत होनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में अधिकारों का दुरुपयोग समाज के लिए ठीक नहीं है।
जानिए कौन हैं विवादों में घिरे अफसर अलंकार अग्निहोत्री?
अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के रहने वाले हैं। वे एक इंजीनियरिंग स्नातक यानी बीटेक डिग्री धारक हैं। इसके साथ ही उन्होंने कानून यानी एलएलबी की भी उच्च शिक्षा पूरी की है, जिससे वे नियमों के अच्छे जानकार माने जाते हैं।
उन्होंने यूपीपीएससी 2016 की प्रतिष्ठित राज्य सिविल सेवा परीक्षा में पूरे प्रदेश में 15वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद साल 2019 में उन्होंने पीसीएस अधिकारी के रूप में अपने सेवा करियर की शुरुआत की थी। उन्हें एक मेधावी अधिकारी के रूप में देखा जाता था।
अपने प्रशासनिक करियर में उन्होंने विभिन्न जिलों में बतौर एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर बेहतरीन सेवाएं दीं। वे लखनऊ में सहायक नगर आयुक्त के पद पर भी तैनात रहे। इसके बाद उन्हें बरेली जिले के महत्वपूर्ण सिटी मजिस्ट्रेट पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
आखिर किस वजह से योगी सरकार ने किया था सस्पेंड?
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अनुशासनहीनता के मामले में सख्त कदम उठाया था। सरकार ने 26 जनवरी 2025 को अलंकार अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। उन्होंने सार्वजनिक मंच से शिक्षा के नए नियमों की खुली आलोचना की थी।
मंच से इस्तीफा देने की घोषणा करने के कारण उन्हें आचरण नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। निलंबन के बाद जांच पूरी होने तक उन्हें शामली जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से अटैच किया गया है, क्योंकि नियमों के तहत ऐसी बयानबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित है।
अग्निहोत्री पहले भी प्रयागराज माघ मेले के दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाओं का विरोध कर चुके हैं। तब उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े एक मामले में सरकारी इंतजामों को धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
Author: Ajay Mishra


