New Delhi News: सनातन धर्म में पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। लेकिन कई बार नियम न मानने से फल नहीं मिलता। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी अनुष्ठान से पहले संकल्प लेना सबसे जरूरी है। बिना संकल्प की गई पूजा अधूरी मानी जाती है और इसका सारा पुण्य नष्ट हो जाता है।
हिन्दू धर्म ग्रंथों में ईश्वर की आराधना के कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने पर ही व्रत और पूजा का पूरा फल मिलता है। अगर हम इन नियमों की अनदेखी करते हैं, तो देवी-देवता नाराज हो सकते हैं। इसका सीधा असर हमारे जीवन और साधना पर पड़ता है।
क्यों जरूरी है पूजा से पहले संकल्प?
धार्मिक विद्वान मानते हैं कि बिना संकल्प के शुरू किया गया कोई भी धार्मिक कार्य सफल नहीं होता। मान्यता है कि संकल्प के बिना की गई पूजा का पुण्य देवराज इंद्र ले जाते हैं। इसलिए सामान्य पूजा हो या कोई बड़ा अनुष्ठान, सबसे पहले भगवान के सामने संकल्प अवश्य लेना चाहिए।
संकल्प का सीधा अर्थ अपने इष्टदेव को साक्षी मानना है। जब कोई व्यक्ति व्रत या पूजा करता है, तो वह भगवान से प्रार्थना करता है। वह ईश्वर से अपनी मनोकामना पूरी करने का आग्रह करता है। साथ ही अनुष्ठान के बिना किसी विघ्न के पूरा होने की कामना भी करता है।
इस आसान विधि से लें पूजा का संकल्प
संकल्प लेने की विधि बहुत ही आसान और प्रभावकारी है। पूजा शुरू करने से पहले भक्त को अपने दाहिने हाथ में थोड़ा जल लेना चाहिए। जल के साथ हाथ में अक्षत और कुछ ताजे फूल भी रखने चाहिए। इसके बाद पूरी श्रद्धा से भगवान श्री गणेश का ध्यान करना चाहिए।
भगवान गणेश सृष्टि के पंचमहाभूतों के अधिपति माने जाते हैं। इनमें अग्नि, पृथ्वी, जल, वायु और आकाश शामिल हैं। गणेश जी का ध्यान करते हुए अपनी इच्छा प्रकट करें। इस विधि से संकल्प लेने पर पूजा में कोई बाधा नहीं आती है और भक्त को अपने व्रत का पूरा फल मिलता है।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


