अमेरिकी सरकार के कड़े एआई प्रतिबंधों के आगे फेल हुआ ‘वॉशिंगटन’ का चक्रव्यूह, भारतीयों के जादुई जुगाड़ ने उड़ाए होश

Technology News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में इस वक्त एक नया और भयंकर कोल्ड वॉर शुरू हो चुका है। अमेरिकी कंपनी एन्थ्रोपिक ने जैसे ही अपने सबसे शक्तिशाली एआई मॉडल्स ‘Claude Fable 5’ और ‘Mythos 5’ को लॉन्च किया, वैसे ही अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर इस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।

अब स्थिति यह है कि जो अमेरिकी नागरिक नहीं है, वह इस एआई टूल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकता। यहां तक कि इस एआई को बनाने वाले मशहूर रिसर्चर आंद्रेज करपैथी भी अमेरिकी नागरिक न होने के कारण इसे एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन भारतीय डेवलपर्स ने सोशल मीडिया पर ऐसे जादुई ‘जुगाड़’ शेयर किए हैं, जिसने अमेरिकी प्रतिबंधों की हवा निकाल दी है।

साइबर हमलों के डर से अमेरिकी सरकार ने लगाया कड़ा बैन

एन्थ्रोपिक के ये नए एआई मॉडल्स सामान्य कामों के साथ-साथ साइबर सिक्योरिटी और कोडिंग में इतने ज्यादा एडवांस हैं कि अमेरिकी सरकार को इनके गलत इस्तेमाल का बड़ा डर सताने लगा है। वॉशिंगटन को डर है कि अगर यह तकनीक चीन या रूस जैसे देशों के हाथ लग गई, तो इसका इस्तेमाल खतरनाक साइबर हमलों के लिए हो सकता है।

इसी वजह से अमेरिकी सरकार के एक्सपोर्ट कंट्रोल नियमों के तहत इन दोनों एआई टूल्स के विदेशी इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब अमेरिकी प्रशासन के नियमों के मुताबिक केवल अमेरिकी आईडी और वहां की लोकेशन वाले लोग ही इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस सख्त नियम से पूरी दुनिया के टेकर्स हैरान हैं।

भारतीय डेवलपर्स की खुली चुनौती: ‘क्या हमें रोक पाओगे?’

जैसे ही इंटरनेट पर इस कड़े प्रतिबंध की खबर फैली, भारतीय टेक कम्युनिटी में हलचल मच गई। एक्स और गिटहब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर भारतीय डेवलपर्स ने खुलकर अमेरिकी सरकार के इस फैसले को चुनौती दे दी है। भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने सोशल मीडिया पर वीपीएन, विदेशी प्रॉक्सी सर्वर और रिमोट डेस्कटॉप जैसे कई आसान तरीके शेयर कर दिए हैं।

इन अनूठे तरीकों के जरिए भारत में बैठे डेवलपर्स भी इन प्रतिबंधित टूल्स को आसानी से चला रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगी। आने वाले समय में एन्थ्रोपिक और अमेरिकी सरकार पहचान की जांच को बहुत कड़ा करने वाली है, जिसमें यूजर के असली पासपोर्ट और बायोमेट्रिक डेटा की जांच होगी।

विदेशी एआई पर निर्भरता भारत के लिए बन सकती है बड़ा खतरा

इस पूरे विवाद ने भारत के सामने एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। आज भारत में हजारों स्टार्टअप्स और लाखों डेवलपर्स पूरी तरह से अमेरिकी एआई टूल्स पर निर्भर हैं। अगर कल को अमेरिका भारत के लिए अपने सभी एडवांस एआई मॉडल्स को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है, तो भारत का पूरा टेक इकोसिस्टम संकट में आ सकता है।

यही वजह है कि देश के बड़े टेक लीडर्स अब सरकार से स्वदेशी एआई क्षमताएं बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। भारत सरकार ने ‘नेशनल एआई मिशन’ के तहत इस दिशा में कदम भी बढ़ाए हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि भारत जुगाड़ ढूंढने के बजाय अपना खुद का ‘सुपर एआई’ मॉडल और डेटा सेंटर्स तैयार करे।

Author: Mohit

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