Spiritual News: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या तिथि का बेहद खास और रहस्यमयी महत्व बताया गया है। इस तिथि के मुख्य अधिपति देवता पितृ माने जाते हैं। जब भी अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे बेहद पवित्र सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
इस बार 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या का बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या की रात जितनी फलदायी होती है, उतनी ही संवेदनशील भी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन 4 खास स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।
भूलकर भी श्मशान घाट और खंडहरों के पास न जाएं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या की तिथि पर नकारात्मक और तामसिक शक्तियां अत्यधिक सक्रिय हो जाती हैं। इसलिए इस दिन श्मशान घाट या कब्रिस्तान के आस-पास से बिल्कुल नहीं गुजरना चाहिए। ऐसा करने से ये बुरी शक्तियां आपके ऊपर हावी हो सकती हैं और तांत्रिक गतिविधियां भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इसके अलावा अमावस्या के दिन किसी पुराने खंडहर, वीरान जगह या सुनसान भवनों में जाने से सख्त परहेज करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में इन स्थानों को नकारात्मक ऊर्जा का मुख्य केंद्र माना गया है। ऐसी जगहों पर जाने से मानसिक तनाव, डर या कोई बड़ी दुर्घटना होने की संभावना रहती है।
नदी, कुएं और सुनसान चौराहों से बनाए रखें दूरी
धार्मिक परंपराओं के अनुसार नदी, तालाब, गहरे कुएं और बावड़ी जैसे जल स्रोतों के पास भी नकारात्मक शक्तियों का वास माना जाता है। अमावस्या की रात को ये शक्तियां बहुत अधिक शक्तिशाली हो जाती हैं। इसलिए अमावस्या की सूनी रात में इन पानी वाले स्थानों के पास जाने से बचना चाहिए।
लोक मान्यताओं के मुताबिक बहुत से लोग अमावस्या पर अपनी बलाएं टालने के लिए चौराहों पर टोने-टोटके की चीजें रख देते हैं। यदि अनजाने में भी इन चीजों पर किसी का पैर पड़ जाए, तो जीवन में भारी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इसलिए सुनसान चौराहे और जंगलों में जाने से बचें।
Pandit Balkrishan Sharma


