सूर्य का मिथुन राशि में गोचर, संक्रांति पर कर लें इन 5 चीजों का दान, टल जाएगा हर बड़ा संकट

Delhi News: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव का राशि परिवर्तन एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। जब ग्रहों के राजा सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर अपने मित्र बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करते हैं, तो इसे मिथुन संक्रांति कहा जाता है। इस दिन पवित्र स्नान और दान का विशेष महत्व है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मिथुन संक्रांति के इस पुण्य काल में किया गया दान जीवन के बड़े से बड़े संकटों को आसानी से टाल देता है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मान-सम्मान चाहते हैं, तो इस विशेष दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ खास चीजों का दान अवश्य करें।

अन्न और जल का महादान

सनातन परंपरा में अन्न दान को संसार का सबसे बड़ा दान माना गया है। मिथुन संक्रांति के पावन दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को गेहूं अथवा चावल का दान करना चाहिए। ऐसा करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

यह संक्रांति तेज गर्मी के मौसम में आती है, इसलिए इस समय प्यासे को पानी पिलाना सर्वोत्तम पुण्य कर्म है। आप किसी मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर राहगीरों के लिए मिट्टी के घड़े का दान कर सकते हैं। इस उपाय से कुंडली में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति बहुत मजबूत होती है।

तिल, गुड़ और वस्त्रों का विशेष दान

धार्मिक दृष्टिकोण से संक्रांति के दिन तिल और गुड़ का दान करना बेहद शुभ फल देता है। ज्योतिष में गुड़ का संबंध सूर्य देव से और तिल का संबंध शनि देव से माना गया है। इन दोनों के दान से करियर की बाधाएं दूर होती हैं और सेहत से जुड़े संकटों का समाधान होता है।

इस विशेष तिथि पर किसी गरीब या बेसहारा व्यक्ति को साफ-सुथरे सूती वस्त्र दान करने चाहिए। मौसम के अनुकूल हल्के कपड़ों का दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही कुंडली में राहु और केतु जैसे क्रूर ग्रहों के सभी नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह शांत हो जाते हैं।

मौसमी फल और छतरी का महत्व

गर्मी के मौसम में आने वाले फल जैसे आम, तरबूज या खरबूजा दान करने से मानसिक शांति मिलती है। इसके साथ ही तेज धूप से बचने के लिए छाते का दान करना भी इस दिन विशेष फलदायी माना गया है। यह दान आपके जीवन में अचानक आने वाली सभी मुसीबतों को दूर रखता है।

शास्त्रों के अनुसार दान हमेशा नि:स्वार्थ भाव से और प्रसन्न मन से करना चाहिए। दिखावे या अहंकार के साथ किया गया दान अपना वास्तविक पुण्य खो देता है। इस संक्रांति पर अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करके आप सूर्य देव की कृपा के भागी बन सकते हैं।

Author: Pandit Balkrishan Sharma

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