Haridwar News: हिंदू धर्म में सावन के महीने को बेहद पवित्र और देवों के देव महादेव को समर्पित माना गया है। साल 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक रहने वाला है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा और पवित्र जलाभिषेक करने का विशेष धार्मिक महत्व होता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में ही भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले भीषण विष को अपने कंठ में समाहित किया था। विष के तीव्र प्रभाव से जब शिव जी के शरीर का तापमान बढ़ने लगा, तब समस्त देवताओं ने उन पर शीतल जल अर्पित कर उन्हें अद्भुत ठंडक प्रदान की थी।
इसी ऐतिहासिक घटना के बाद से ही सावन के पावन महीने में भगवान शिव को पवित्र जल चढ़ाने की महान परंपरा शुरू हुई। सावन में कांवड़ यात्रा का भी एक विशेष महत्व है। माना जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने सबसे पहले इस दिव्य कांवड़ यात्रा की शुरुआत की थी।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर कांवड़
सावन के अलावा महाशिवरात्रि का पावन समय भी भगवान शिव की विशेष आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। महाशिवरात्रि का यह महान पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र विवाह का प्रतीक है। इस बेहद खास अवसर पर भी शिव भक्त पवित्र नदियों का पावन जल लाकर शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक चढ़ाते हैं।
देश के कई प्रमुख क्षेत्रों में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भी बड़े स्तर पर कांवड़ यात्रा निकाली जाती है। श्रद्धालु मीलों दूर से पैदल चलकर पवित्र गंगाजल लाते हैं। इसके बाद वे चतुर्दशी तिथि को अपने क्षेत्र के शिवालयों में जाकर भगवान भोलेनाथ का भव्य जलाभिषेक संपन्न करते हैं।
मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का महत्व
प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से विशेष पूजा की जाती है। कई स्थानों पर श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर इस अवसर पर छोटी दूरी की कांवड़ यात्रा का संकल्प लेते हैं और जलाभिषेक करते हैं।
इसी तरह हर माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला प्रदोष व्रत भी शिव कृपा पाने का बड़ा माध्यम है। इस दिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में शिव जी की पूजा की जाती है। इस विशेष दिन भी स्थानीय स्तर पर श्रद्धालु छोटी कांवड़ यात्राएं निकालते हैं।
कार्तिक मास की प्राचीन परंपरा
भारत के कुछ हिस्सों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार कार्तिक मास के दौरान भी शिव मंदिरों में पवित्र जल चढ़ाने का नियम है। यह परंपरा प्राचीन काल से निरंतर चली आ रही है। हालांकि, यह सावन के महीने जितनी व्यापक और बड़े पैमाने पर आयोजित नहीं की जाती है।
कार्तिक के महीने में भी श्रद्धालु कम दूरी की कांवड़ यात्रा निकालकर भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट करते हैं। अमूमन लोग सावन को ही कांवड़ यात्रा का एकमात्र समय मानते हैं। मगर इन चार अन्य विशेष अवसरों पर भी महादेव का कांवड़ के जल से अभिषेक किया जाता है।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


