पेरेंटिंग गाइड: बच्चे को दोस्तों के घर भेजने से पहले जरूर सिखाएं ये 5 जरूरी बातें, बढ़ जाएगी सुरक्षा

Delhi News: आज के आधुनिक दौर में बच्चों का अपने दोस्तों के घर जाकर खेलना, ग्रुप स्टडी करना या थोड़ा समय साथ बिताना बेहद आम बात हो गई है। खासकर 9 से 12 साल की उम्र के बच्चे खुद को पहले से कहीं ज्यादा समझदार और स्वतंत्र महसूस करने लगते हैं।

हालांकि, इस उम्र में बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंताएं और जिम्मेदारियां भी काफी बढ़ जाती हैं। ऐसे में बेहद जरूरी है कि बच्चे को किसी दूसरे के घर भेजने से पहले कुछ बेहद महत्वपूर्ण और बुनियादी बातें जरूर सिखाई जाएं, ताकि वे हर परिस्थिति में खुद को सुरक्षित रख सकें।

असहज महसूस होने पर तुरंत एक्शन लेना सिखाएं

बच्चों को बहुत ही सरल भाषा में समझाएं कि यदि कोई व्यक्ति उनसे कोई ऐसी बात करे, कोई अजीब चीज दिखाए या ऐसा व्यवहार करे जिससे उन्हें थोड़ा भी अजीब या असहज महसूस हो, तो वे तुरंत इसकी जानकारी अपने माता-पिता को दें। बच्चों में यह भरोसा जगाना बहुत जरूरी है।

बच्चों को यह बात भी अच्छी तरह समझानी चाहिए कि अगर कोई व्यक्ति उनसे किसी बात को माता-पिता से छिपाने के लिए कहे या कहे कि ‘मम्मी-पापा को मत बताना’, तो वह बात जरूर घर पर आकर बताएं। ऐसे सतर्क करने वाले संकेत बच्चों को गलत परिस्थितियों से बचाते हैं।

गुड टच और बैड टच की सही जानकारी देना जरूरी

हर बच्चे को अपने शरीर की सुरक्षा और सीमाओं के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्हें स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि उनके शरीर पर सिर्फ और सिर्फ उनका अपना अधिकार है। अगर कोई भी व्यक्ति उन्हें गलत तरीके से छूने की कोशिश करे, तो वे तुरंत उसका विरोध करें।

ऐसी स्थिति में बच्चों को वहां से तुरंत हट जाना चाहिए और बिना डरे किसी भरोसेमंद बड़े या सीधे अपने माता-पिता को इसकी जानकारी देनी चाहिए। इसके अलावा, कई बार बच्चे दोस्तों के घर पर कुछ ऐसी बातें, वीडियो या मजाक देख लेते हैं जो उनकी उम्र के अनुकूल नहीं होते।

बिना अनुमति कहीं और जाने पर लगाएं सख्त पाबंदी

बच्चों को सिखाएं कि अगर कोई भी कंटेंट या व्यवहार उन्हें परेशान करता है, तो वे इसे छिपाने के बजाय तुरंत अपने माता-पिता से साझा करें। इसके साथ ही, यदि जिस घर में बच्चा गया है वहां से उसे किसी पार्क, बाजार या दूसरी जगह ले जाने की योजना बनती है, तो वह पहले अनुमति ले।

बिना माता-पिता को पहले जानकारी दिए किसी भी दूसरी जगह जाना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल भी सही नहीं माना जाता है। बच्चों की सुरक्षा केवल कड़े नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके साथ एक बेहद मजबूत और भरोसेमंद संवाद स्थापित करने से ही पूरी तरह सुनिश्चित होती है।

Author: Karuna Sen

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