दिल्ली गोल्फ क्लब को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, ऐतिहासिक स्मारकों के पास बनी इमारतें सील करने के आदेश पर लगाई रोक

Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गोल्फ क्लब को एक बड़ी और असाधारण राहत दी है। शीर्ष अदालत ने क्लब परिसर में बनी इमारतों को सील करने के अपने पुराने आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने नई दिल्ली नगर पालिका और दिल्ली पुलिस को दिया अपना निर्देश फिलहाल 22 जुलाई तक टाल दिया है।

यह विवाद दिल्ली गोल्फ क्लब के मुख्य प्रवेश द्वार के पास बनी इमारतों से जुड़ा है। यह निर्माण एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक के प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है। नियमों के मुताबिक संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण कार्य करना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाता है।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह नया आदेश जारी किया है। सुनवाई के दौरान दिल्ली गोल्फ क्लब की तरफ से देश के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने मामले पर अपना विस्तृत जवाब और नया सुझाव देने के लिए कोर्ट से थोड़ा समय मांगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद गोल्फ क्लब को दी असाधारण राहत

शीर्ष अदालत की पीठ ने साफ किया कि उन्हें पिछले फैसले को बदलने का कोई ठोस आधार नहीं दिखता। इसके बावजूद कोर्ट क्लब को एक असाधारण राहत दे रहा है। अदालत ने एनडीएमसी के चेयरपर्सन और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दिए सख्त निर्देशों को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है।

इस सप्ताह बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट का रुख काफी कड़ा था। तब सुप्रीम कोर्ट ने गोल्फ क्लब के पास स्थित लाल बंगला एक और दो के 100 मीटर के दायरे में होने वाली सभी व्यावसायिक गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने का एक कड़ा निर्देश जारी किया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने देश के प्राचीन स्मारकों की जर्जर हालत पर गहरी चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा कि देश के ज्यादातर ऐतिहासिक स्थलों पर संरक्षण का कोई काम नहीं दिख रहा है। उचित रखरखाव न होने के कारण ये बेशकीमती राष्ट्रीय धरोहरें लगातार बर्बाद हो रही हैं।

लापरवाही बरतने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को कोर्ट का नोटिस

अदालत ने पहले क्लब परिसर की नौ अन्य ऐतिहासिक संरचनाओं के 20 मीटर के दायरे में भी काम रोक दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब अपने इस आदेश को भी अस्थाई रूप से रोक दिया है। इसके साथ ही पीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्मारकों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने के लिए एएसआई महानिदेशक को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पीठ ने कहा कि एएसआई ने प्राचीन अधिनियम के नियमों के तहत संरक्षित स्थलों के आसपास अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

अदालत ने एएसआई निदेशक से पूछा है कि इस घोर लापरवाही के लिए उनके खिलाफ दंडात्मक आदेश क्यों न पारित किए जाएं। शीर्ष अदालत ने निदेशक को आदेश दिया है कि वह अगली सुनवाई के दिन अदालत के समक्ष अपना व्यक्तिगत स्पष्टीकरण हलफनामा जरूर दाखिल करें।

राजीव सूरी की याचिका से खुला ऐतिहासिक धरोहरों पर अतिक्रमण का मामला

दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण का यह संवेदनशील मुद्दा राजीव सूरी की एक जनहित याचिका से जुड़ा है। उन्होंने दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में स्थित लोदी काल के प्राचीन स्मारक शेख अली की गुमटी पर हुए अवैध कब्जे का मामला अदालत में उठाया था।

इस मामले की सुनवाई के दौरान ही अदालत को दिल्ली गोल्फ क्लब के अंदर मौजूद दस प्राचीन संरचनाओं की बदहाली का पता चला। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे परिसर का संज्ञान लिया। कोर्ट इन धरोहरों को बचाने के लिए अब लगातार कड़े कदम उठा रहा है।

गोल्फ क्लब प्रबंधन अब सीलिंग की कार्रवाई से बचने के लिए कानूनी रास्ते तलाश रहा है। वहीं एएसआई को भी अब कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

Author: Gaurav Malhotra

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