मेरठ में कभी भी हो सकता है दिल्ली जैसा बड़ा बेसमेंट हादसा, बिना नक्शे और फायर एनओसी के चल रहा मौत का धंधा

Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए सैकड़ों बेसमेंट लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इन तंग और दमघोंटू भूमिगत परिसरों में बिना किसी सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से कोचिंग सेंटर और दुकानें चलाई जा रही हैं। जिम्मेदार विभाग इस गंभीर खतरे पर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं।

मेरठ विकास प्राधिकरण के नियमों के मुताबिक बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोरेज के लिए ही वैध है। इसके बावजूद शहर के पीएल शर्मा रोड, गंगानगर और सेंट्रल मार्केट जैसे प्रमुख व्यापारिक इलाकों में नियमों का खुला उल्लंघन जारी है। बिना नक्शा पास कराए यहां खतरनाक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

सालभर से ठप पड़ा है मेडा का जांच अभियान

पिछले वर्ष दिल्ली में हुए भीषण बेसमेंट हादसे के बाद मेडा प्रशासन ने आनन-फानन में व्यापक सर्वे शुरू किया था। उस दौरान प्राधिकरण ने दो दिनों के भीतर कार्रवाई करते हुए 66 अवैध बेसमेंट को पूरी तरह सील कर दिया था। मेडा ने तब करीब 123 व्यावसायिक बेसमेंट का प्रारंभिक सर्वे पूरा किया था।

इस सरकारी जांच में 34 स्वीकृत और 32 पूरी तरह से बिना नक्शे वाले बेसमेंट में अवैध कारोबार पाया गया था। मगर अफसोस की बात यह है कि इस शुरुआती कार्रवाई के बाद सालभर से कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया गया। वर्तमान में विभागीय कार्रवाई महज औपचारिक नोटिस भेजने तक ही सीमित रह गई है।

बिना फायर सेफ्टी और वेंटिलेशन के चल रहा कारोबार

वर्तमान में मेरठ शहर के 280 से अधिक बेसमेंट में अवैध रूप से अलग-अलग व्यापारिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश भवनों के पास अग्निशमन विभाग की अनिवार्य एनओसी तक मौजूद नहीं है। इन खतरनाक बेसमेंट में बैंक, लैब, हॉस्पिटल, कोचिंग, शोरूम और रेस्टोरेंट की बड़ी किचन्स तक संचालित की जा रही हैं।

इन संकरे बेसमेंट में चारों तरफ बिजली के तारों का जाल फैला हुआ है और आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था नहीं है। नियमों के अनुसार जहरीली गैसों को बाहर निकालने के लिए प्रति 50 वर्ग मीटर पर एग्जॉस्ट फैन और ऑटोमैटिक वॉटर स्प्रिंकलर सिस्टम होना बेहद अनिवार्य है।

अवैध निर्माणों के खिलाफ मेडा प्रशासन का कहना है कि वे समय-समय पर औचक निरीक्षण कर आवश्यक कानूनी नोटिस जारी करते हैं। मानकों के विपरीत बने बेसमेंट स्वामियों को पहले कंपाउंडिंग का मौका दिया जाता है। यदि अवैध निर्माण शमन के दायरे में नहीं आता, तो नियमों के तहत बेसमेंट को मिट्टी से भरने का प्रावधान है।

Author: Ajay Mishra

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