अयोध्या मेडिकल कॉलेज में बड़ा घोटाला: 10 गुना महंगे दामों पर खरीदी गईं दवाएं, करोड़ों के भ्रष्टाचार का खुलासा!

Ayodhya News: राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज, दर्शननगर में दवाओं की खरीद में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। पूर्व प्राचार्य के कार्यकाल के दौरान यहाँ जीवन रक्षक दवाएं शासनादेशों का उल्लंघन करते हुए अत्यंत महंगी दरों पर खरीदी गईं। यह मामला तब प्रकाश में आया जब दवा आपूर्ति करने वाली कंपनी ने अपने बकाया भुगतान की मांग की।

दस्तावेजों की जांच में पता चला है कि कॉलेज प्रशासन ने यूपी मेडिकल कॉरपोरेशन के बजाय स्थानीय खरीद (LP) को प्राथमिकता दी। इसका नतीजा यह रहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की अनुबंध दरों के मुकाबले यहाँ दवाएं 10 से 20 गुना अधिक कीमतों पर खरीदी गईं। मेडिकल कॉलेज में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान दवाओं की स्थानीय खरीद का आंकड़ा तीन करोड़ 75 लाख रुपये से अधिक रहा है।

पैरासीटामोल इंजेक्शन की खरीद ने खोले राज

भ्रष्टाचार की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुखार में इस्तेमाल होने वाला 100 एमएल पैरासीटामोल इंजेक्शन, जो KGMU की दर पर मात्र 44 रुपये में मिलता है, उसे कॉलेज ने स्थानीय स्तर पर 744 रुपये में खरीदा। इसी तरह मेरोपेनम इंजेक्शन 110 रुपये की जगह 1,067 रुपये में और लीबोफुक्सासिन 66 रुपये के बजाय 574 रुपये में खरीदे गए।

शासन के स्पष्ट निर्देश थे कि आवंटित बजट की 80 प्रतिशत दवाएं यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से ली जाएं और केवल 20 प्रतिशत ही स्थानीय स्तर पर खरीदी जा सकें। हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने इन आदेशों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। पूर्व प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा और वित्त नियंत्रक रवि सिंह पर अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच करीब 90 प्रतिशत भुगतान करने का आरोप है।

प्राचार्य की सख्त कार्रवाई, शासन को रिपोर्ट

वर्तमान प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया ने फाइलें सामने आने के बाद तत्काल प्रभाव से लंबित भुगतानों पर रोक लगा दी है। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियम विरुद्ध हुई इस खरीद के पूरे प्रकरण से उच्च शासन को अवगत कराया जा रहा है, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

याद रहे कि इससे पहले भी इस कॉलेज में 40 लाख रुपये के ‘वॉटरलेस शैंपू’ और ‘बॉडीवॉश’ की अनावश्यक खरीद का मामला सुर्खियों में रहा है, जिसकी जांच अभी जारी है। बार-बार सामने आ रहे ऐसे वित्तीय अनियमितताओं के मामलों ने मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अयोध्या स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

Author: Shilla Bhatia

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