Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित चेस्टर हिल भूमि विवाद में रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। रेरा ने कहा है कि वर्ष 2020 से पंजीकृत 17 संयुक्त विकास समझौतों (JDA) में से केवल पांच में गैर-कृषक साझेदार शामिल हैं। बाकी 12 परियोजनाओं के सभी साझेदार मूल रूप से कृषक ही हैं।
रेरा अध्यक्ष आरडी धीमान ने आवास विभाग के तीखे सवालों का आधिकारिक जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि सभी 17 परियोजनाओं का पंजीकरण तय नियमों के तहत वैधानिक प्रक्रिया पूरी करके हुआ था। राज्य की आवासीय परियोजनाओं में टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 118 के कथित उल्लंघन पर घमासान जारी है।
क्यों खड़ा हुआ चेस्टर हिल्स पर इतना बड़ा बवाल?
यह पूरा विवाद सोलन जिले की बेहद चर्चित चेस्टर हिल्स हाउसिंग परियोजना से शुरू हुआ है। इस प्रोजेक्ट पर धारा 118 के नियमों को ठेंगा दिखाने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह सख्त कानून गैर-कृषकों को राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना कृषि योग्य भूमि खरीदने या विकसित करने से रोकता है।
रेरा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि गैर-कृषक साझेदारों वाले सभी पांच प्रोजेक्ट 17 अक्टूबर 2023 से पहले ही पंजीकृत हो चुके थे। इसी तारीख को राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ने नया नियम लागू किया था। नए आदेश के तहत जेडीए के सभी साझेदारों का अनिवार्य रूप से कृषक होना तय किया गया था।
विजिलेंस जांच के आदेश से नौकरशाही में भारी हड़कंप
मुख्य सचिव (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) ने नवंबर 2025 के आदेश में चेस्टर हिल्स की दो परियोजनाओं को क्लीन चिट दी थी। तब जेडीए को नॉन-एस्ट डॉक्यूमेंट मानकर धारा 118 का उल्लंघन नहीं माना गया था। लेकिन 7 मई 2026 को मुख्य सचिव संजय गुप्ता के निर्देश पर विजिलेंस जांच शुरू हो गई।
विजिलेंस ब्यूरो को 15 दिनों के भीतर उन सभी परियोजनाओं का पूरा रिकॉर्ड खंगालने का जिम्मा सौंपा गया है। जांच टीम उन प्रोजेक्ट्स पर विशेष नजर रख रही है जहां गैर-कृषक साझेदार जुड़े हैं। अचानक शुरू हुई इस स्वतंत्र जांच से हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच गहरा टकराव पैदा हो गया है।
300 करोड़ रुपये के अवैध भूमि सौदों का गंभीर आरोप
सोलन का यह चेस्टर हिल्स विवाद अब बहुत बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है। इस मामले में करीब 275 बीघा जमीन के बेनामी लेनदेन और अवैध सौदों के आरोप लगे हैं। कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुरुआती जांच में 150 बीघा जमीन में सीधे तौर पर गड़बड़ी की बात कही थी।
इस संदिग्ध भूमि की अनुमानित कीमत करीब 300 करोड़ रुपये आंकी गई है। फिलहाल सोलन के उपायुक्त स्तर पर इस पूरे मामले की विस्तृत जांच चल रही है। भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) जैसे विपक्षी दलों ने इस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को चारों तरफ से घेर लिया है।
Author: Sunita Gupta

