Delhi News: चिकित्सा विज्ञान की दुनिया से अक्सर ऐसे हैरान करने वाले मामले सामने आते हैं, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। एक 28 वर्षीय महिला पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रेग्नेंट होने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर बार उसे केवल असफलता ही हाथ लग रही थी। आखिरकार जब थक-हारकर उसने देश के बड़े फर्टिलिटी एक्सपर्ट से संपर्क किया, तो जांच में जो असली वजह सामने आई उसने डॉक्टरों सहित पूरे परिवार को चौंका दिया।
आज के इस आधुनिक दौर में बहुत से दंपत्तियों को कंसीव करने यानी माता-पिता बनने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार सालों-साल लगातार प्रयास करने के बाद भी जब सफलता नहीं मिलती, तो कपल्स के बीच भारी मानसिक तनाव, एंग्जायटी और आपसी दूरियां बढ़ने लगती हैं। ऐसी लाचार स्थिति में अक्सर महिलाएं खुद को ही जिम्मेदार मानने लगती हैं और अतीत में हुई अपनी छोटी-मोटी गलतियों को याद करके घुटने लगती हैं।
“मुझे लगा था कोई फर्क नहीं पड़ेगा”—जानिए अतीत का वो सच
परामर्श के दौरान भावुक होते हुए महिला ने डॉक्टर से कहा, ‘मुझे लगा था कि पुरानी बातों से अब कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन मेरी यह सोच बिल्कुल गलत थी।’ महिला के इस बयान के बाद परिवार में कई तरह के सवाल उठने लगे कि आखिर ऐसी कौन सी पुरानी गलती थी, जो उसके मां बनने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन गई। दरअसल, शादी से पहले इस महिला ने एक बार अनचाही प्रेग्नेंसी के कारण अबॉर्शन पिल (गर्भपात की दवा) ली थी।
महिला को यह पूरा भरोसा था कि वह जब चाहेगी, बेहद आसानी से दोबारा प्रेग्नेंट हो जाएगी। लेकिन शादी के तीन साल बाद तक हर महीने जब उसका होम प्रेग्नेंसी टेस्ट नेगेटिव आता रहा, तो उसकी चिंता और डिप्रेशन खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। इस बीच समाज और ससुराल की तरफ से मिलने वाले तानों ने उसे मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया, जिसके कारण उसने लोक-लाज के डर से पारिवारिक समारोहों और शादियों में जाना भी पूरी तरह बंद कर दिया था।
रिपोर्ट्स थीं बिल्कुल नॉर्मल, फिर भी डॉक्टर ने पकड़ी ये छिपी बीमारी
फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. महिमा ने इस जटिल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दंपत्ति की पुरानी सभी मेडिकल रिपोर्ट्स की बारीकी से जांच की। हैरान करने वाली बात यह थी कि पति और पत्नी दोनों की ही तमाम पुरानी रिपोर्ट्स बिल्कुल नॉर्मल थीं, जिसके कारण पहले के कई डॉक्टर भी इनफर्टिलिटी की असली वजह नहीं पकड़ पा रहे थे। तभी महिला ने डॉक्टर को अपने शरीर में होने वाले एक बेहद मामूली से बदलाव के बारे में बताया।
महिला ने कहा कि उसकी आंखें और मुंह अक्सर बहुत ज्यादा सूखे रहते हैं। उसे करीब छह साल पहले एक सामान्य ऑटोइम्यून बीमारी भी हुई थी। इस महत्वपूर्ण सुराग को पकड़ते हुए जब डॉ. महिमा ने महिला के कुछ विशेष एडवांस टेस्ट करवाए, तो पता चला कि वह ‘जोग्रेन्स सिंड्रोम’ (Sjögren’s Syndrome) नामक एक बेहद दुर्लभ ऑटोइम्यून डिसऑर्डर से पीड़ित है। इस बीमारी में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है।
क्या है जोग्रेन्स सिंड्रोम और कैसे यह बनता है इनफर्टिलिटी का कारण?
जोग्रेन्स सिंड्रोम से पीड़ित होने पर महिला की आंखों, मुंह, त्वचा और विशेष रूप से योनि (Vagina) में अत्यधिक सूखापन रहने लगता है। इस अंदरूनी सूखेपन के कारण पुरुषों के स्पर्म गर्भाशय तक सुरक्षित नहीं पहुंच पाते, जिससे प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना लगभग असंभव हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, करीब 10 से 15 फीसदी कपल्स को ‘अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी’ का सामना करना पड़ता है, जहां बाहरी तौर पर सभी टेस्ट नॉर्मल दिखते हैं पर गर्भधारण नहीं होता।
डॉ. महिमा ने बताया कि जोग्रेन्स सिंड्रोम जैसी छिपी हुई आंतरिक बीमारियां ही अक्सर इस अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी के पीछे की मुख्य वजह होती हैं। लेकिन इस बीमारी का पता चलने पर बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। अगर सही समय पर इस ऑटोइम्यून स्थिति का सटीक निदान और सही डॉक्टरी इलाज शुरू कर दिया जाए, तो महिला बेहद सुरक्षित तरीके से कंसीव कर सकती है। सही इलाज के बाद अब यह पीड़ित महिला भी जल्द ही मां बनने वाली है।


