Shimla News: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में लोकतंत्र का एक बेहद खूबसूरत और अनोखा रूप सामने आया है। जिला प्रशासन के मुताबिक यहां की 42 ग्राम पंचायतों ने आपसी सहमति से अपने प्रतिनिधियों को निर्विरोध चुन लिया है। इन गांवों में अब न तो कोई चुनावी शोर सुनाई देगा और न ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लगेंगी। राज्य सरकार इस शानदार पहल से खुश होकर इन सभी पंचायतों को विकास कार्यों के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित करने जा रही है।
आपसी भाईचारे से गांवों को मिलेगा करोड़ों का इनाम
राज्य सरकार निर्विरोध चुनी गई प्रत्येक ग्राम पंचायत को उपहार स्वरूप 25-25 लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि देगी। इस तरह शिमला जिले की इन 42 पंचायतों को विकास के लिए कुल 10 करोड़ 50 लाख रुपये का भारी फंड मिलेगा। जिला प्रशासन के 11 ब्लॉकों के तहत आने वाले इन गांवों में यह पैसा बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा। इस ऐतिहासिक फैसले से गांवों में सड़कों, पानी और बिजली की व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
चौपाल ब्लॉक ने बनाया रिकॉर्ड तो कहीं फीका रहा उत्साह
जिले के दूरदराज इलाकों और समृद्ध सेब पट्टी के गांवों में जनता ने राजनीतिक मतभेदों को पूरी तरह भुला दिया। आंकड़ों के अनुसार चौपाल विकासखंड ने इस बार बाजी मारी है और वहां सबसे अधिक 10 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं। इसके विपरीत ननखड़ी, जुब्बल और नारकंडा जैसे इलाकों में सबसे कम केवल एक-एक पंचायत में ही सहमति बन सकी। ग्रामीण जनता ने यह साबित किया कि आपसी भाईचारा राजनीतिक टकराव से कहीं ज्यादा बड़ा होता है।
प्रशासन से प्राप्त अन्य आंकड़ों के मुताबिक बसंतपुर ब्लॉक में 2 और छुहारा में 7 पंचायतों को बिना किसी विरोध के चुना गया। इसके साथ ही कोटखाई में 3, कुपव में 3, रामपुर में 2, रोहड़ू में 5 और ठियोग ब्लॉक की 7 पंचायतों में बिना किसी चुनावी टकराव के नए प्रतिनिधि चुन लिए गए हैं। इन सभी क्षेत्रों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर पूरी दुनिया के सामने सामाजिक समरसता और लोकतंत्र की सामूहिक चेतना का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

