New Delhi News: क्या आप भी सुबह सोकर उठते ही अपने घुटनों और जोड़ों में असहनीय दर्द, अकड़न या बेचैनी महसूस करते हैं? क्या आपके लिए सीढ़ियां चढ़ना, सामान्य रूप से चलना या रोजमर्रा के साधारण काम करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है? भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, आज के समय में गठिया यानी अर्थराइटिस की समस्या बेहद आम हो चुकी है। लेकिन इस पुरानी और तकलीफदेह बीमारी का सबसे प्रभावी और पूरी तरह प्राकृतिक समाधान योग में छिपा हुआ है।
गठिया कोई सामान्य या मामूली शारीरिक दर्द नहीं है। यह एक गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली स्थिति है, जिसमें शरीर के विभिन्न जोड़ों में भयंकर सूजन, लगातार अकड़न और असहनीय बेचैनी बनी रहती है। इस बीमारी के कारण पीड़ित व्यक्ति की उठने-बैठने और चलने-फिरने की गतिशीलता बहुत सीमित हो जाती है। इसके चलते घर के छोटे-छोटे काम भी मरीज के लिए बेहद थका देने वाले और मानसिक रूप से परेशान करने वाले बन जाते हैं।
आधुनिक लाइफस्टाइल और शारीरिक तनाव बढ़ा रहे हैं जोड़ों का दर्द
आज की भागमभाग वाली आधुनिक जीवनशैली, ऑफिस में लगातार घंटों एक ही जगह बैठे रहना, गलत पोस्चर यानी बैठने की गलत मुद्रा और बढ़ता शारीरिक तनाव इस बीमारी को और ज्यादा गंभीर बना रहे हैं। ये खराब आदतें हमारे नाजुक जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे उनका प्राकृतिक लचीलापन धीरे-धीरे खत्म होने लगता है और तेज दर्द पैदा होता है। ऐसी गंभीर स्थिति में नियमित योगाभ्यास शरीर के लिए एक मजबूत और सुरक्षित समाधान साबित हो सकता है।
नियमित योग करने से जोड़ों को अंदरूनी तौर पर मजबूती मिलती है और शरीर का प्राकृतिक लचीलापन तेजी से बढ़ने लगता है। यह जोड़ों की पुरानी अकड़न को कम करता है और आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाकर हड्डियों की रक्षा करता है। योग के प्रभाव से न सिर्फ दर्द में तुरंत राहत मिलती है, बल्कि जोड़ों की गतिशीलता भी हमेशा बनी रहती है। इसके कारण मरीज को रोजाना होने वाली शारीरिक थकान से भी पूरी तरह बचाव मिलता है।
“योग युक्त रहें, रोग मुक्त बने रहें”—आयुष मंत्रालय की विशेष सलाह
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने देशवासियों को प्रेरित करते हुए कहा है, “योग युक्त रहें, रोग मुक्त बने रहें।” चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योग अभ्यास न केवल गठिया के बाहरी लक्षणों को नियंत्रित करता है, बल्कि इस बीमारी की मुख्य जड़ पर भी गहराई से काम करता है। रोज सुबह खाली पेट केवल 30 से 45 मिनट का योग अपनी दिनचर्या में शामिल करने से सेहत में बहुत बड़ा और सकारात्मक सुधार देखा जा सकता है।
जो लोग जोड़ों और घुटनों के पुराने दर्द से लंबे समय से परेशान हैं, उन्हें बिना देर किए योग को अपनी रोज की लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लेना चाहिए। हालांकि, कोई भी योगाभ्यास शुरू करने से पहले किसी प्रमाणित योग विशेषज्ञ या थेरेपिस्ट से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। एक्सपर्ट्स के अनुसार गठिया रोग के सुरक्षित प्रबंधन में गोमुखासन, भ्रामरी, पवनमुक्तासन, मर्जरीआसन, ताड़ासन और शीतली प्राणायाम सबसे ज्यादा गुणकारी और लाभकारी माने जाते हैं।
जानिए जोड़ों को लचीला और सूजन मुक्त बनाने वाले इन आसनों के लाभ
इन आसनों में शामिल गोमुखासन कंधों, घुटनों और कूल्हों की पुरानी अकड़न को दूर करने में बेहद असरदार माना जाता है। वहीं पवनमुक्तासन का अभ्यास कमर और घुटनों के दर्द को तेजी से कम करने के साथ-साथ आपके पाचन तंत्र को भी सुधारता है। मर्जरीआसन रीढ़ की हड्डी को पूरी तरह लचीला बनाकर रीढ़ और जोड़ों की जकड़न को जड़ से खत्म करता है। इसके साथ ही ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारकर जोड़ों पर सही संतुलन बनाए रखता है।
शारीरिक आसनों के अलावा प्राणायाम भी इस बीमारी में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। भ्रामरी प्राणायाम का नियमित अभ्यास मानसिक तनाव और चिंता को कम करता है, जो कि गठिया की बीमारी को बढ़ाने का एक बहुत बड़ा और मुख्य कारण माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, शीतली प्राणायाम का अभ्यास हमारे शरीर को अंदरूनी ठंडक प्रदान करता है और जोड़ों में मौजूद पुरानी से पुरानी सूजन को तेजी से कम करने में मदद करता है।


